4. प्रताड़ित बुजुर्ग मां के हक में हाईकोर्ट का फैसला, बेटा-बहू घर से बेदखल

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक प्रताड़ित बुजुर्ग मां के हक में अहम निर्णय सुनाते हुए उसके बेटे और बहू के बेदखली पर मुहर लगा दी है। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने कहा है कि यदि बच्चे अपने बुजुर्ग माता-पिता को मानसिक या शारीरिक रूप से प्रताड़ित करता है तो उसे घर से बेदखल किया जा सकता है। कोर्ट ने बेटे और बहू की याचिका खारिज करते हुए मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल और अपीलीय ट्रिब्यूनल के बेदखली के आदेश को सही ठहराया है।
कोर्ट ने अपने इस महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि वरिष्ठ नागरिक अधिनियम 2007 केवल भरण पोषण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य बुजुर्गों के उनके जीवन के अंतिम पड़ाव में सम्मान, शांति और सुरक्षा देना भी है। दरअसल बिलासपुर मिनोचा कालोनी निवासी 93 वर्षीय बुजुर्ग महिला संतोष खन्ना ने मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल में एक आवेदन पेश किया था। बुजुर्ग महिला का आरोप था कि उसके मकान के पहले मंजिल पर रहने वाले बड़े बेटे देवेन्द्र खन्ना और बहू नीरजा खन्ना उन्हें लगातार प्रताड़ित और परेशान कर रहे हैं। बुजुर्ग महिला ने बेटे बहू को घर से बेदखल करने की गुहार लगाई थी।
बुजुर्ग महिला के द्वारा पेश आवेदन पर जांच परख के बाद मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल ने 12 सितंबर 2024 को बेटा बहू को घर खाली करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ बेटे बहू ने अपीलीय ट्रिब्यूनल के समक्ष भी अपील की, वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली। अंत में ट्रिब्यूनल के आदेश को चुनौती देते हुए बेटे बहू ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और हाईकोर्ट ने भी मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल और अपीलीय ट्रिब्यूनल के आदेश को सही ठहराया है।



