रायपुर नगर निगम में ‘सफाई संकट’: वेतन विसंगतियों पर सड़क पर उतरे कर्मचारी, पुलिस बल प्रयोग पर घिरी महापौर मीनल चौबे

मीनल चौबे के नेतृत्व वाले रायपुर नगर निगम प्रशासन पर अब सवालों की बौछार शुरू हो गई है। एक ओर महापौर कांग्रेस शासनकाल की प्रक्रियाओं पर सवाल उठाते हुए यह कह रही हैं कि “जो प्रक्रिया उनके समय में वैध थी, वह हमारे कार्यकाल में अवैध कैसे हो गई?”, वहीं दूसरी ओर नगर निगम के सफाई कर्मचारी अपनी वेतन विसंगतियों और भुगतान संबंधी समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे सफाई कर्मचारियों पर पुलिस बल का इस्तेमाल किया गया। लाठीचार्ज और बलपूर्वक हटाने की कार्रवाई ने पूरे मामले को राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बना दिया है।
कर्मचारियों का सवाल – “वेतन के लिए आंदोलन क्यों?”
धरना दे रहे सफाई कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा, कई कर्मचारियों के भुगतान में भारी विसंगतियां हैं, और ठेका व्यवस्था के कारण उनकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायतों के बावजूद न तो सफाई ठेकेदारों ने उनकी समस्याओं का समाधान किया और न ही नगर निगम प्रशासन ने कोई ठोस पहल की। मजबूर होकर उन्हें आंदोलन और धरना प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा।

सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर शहर को साफ रखने वाले कर्मचारी अगर अपनी मजदूरी और अधिकारों के लिए सड़क पर बैठने को मजबूर हैं, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
महापौर के बयान पर उठे विरोधाभास
महापौर मीनल चौबे ने हाल ही में कांग्रेस शासनकाल की नीतियों और प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े किए थे। लेकिन अब विपक्ष और आम नागरिक यह पूछ रहे हैं कि यदि वर्तमान प्रशासन खुद को बेहतर और पारदर्शी बता रहा है, तो फिर सफाई कर्मचारियों को आंदोलन की नौबत क्यों आई?
विपक्ष का कहना है कि:
यदि ठेका व्यवस्था में गड़बड़ी है तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
कर्मचारियों का वेतन समय पर क्यों नहीं दिया गया?
प्रशासन संवाद स्थापित करने में विफल क्यों रहा?
और सबसे बड़ा सवाल — कर्मचारियों से बातचीत के बजाय पुलिस बल का इस्तेमाल क्यों किया गया?
पुलिस कार्रवाई ने बढ़ाया आक्रोश
धरना स्थल पर पुलिस की मौजूदगी और बल प्रयोग की तस्वीरों ने पूरे शहर में चर्चा छेड़ दी है। आम लोगों का कहना है कि जिन सफाई कर्मचारियों ने महामारी से लेकर हर मुश्किल दौर में शहर को साफ रखा, उन्हीं कर्मचारियों पर लाठियां बरसाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या प्रशासन आंदोलन को बातचीत से हल नहीं कर सकता था? क्या कर्मचारियों की मांगें इतनी गैरवाजिब थीं कि पुलिस कार्रवाई जरूरी हो गई?
जनता जवाब मांग रही है
रायपुर की जनता अब नगर निगम प्रशासन और महापौर से सीधा जवाब चाहती है:
सफाई कर्मचारियों के वेतन में विसंगतियां क्यों हैं?
ठेका व्यवस्था की निगरानी कौन कर रहा है?
आखिर कर्मचारियों को हड़ताल पर बैठने की नौबत क्यों आई?
और यदि प्रशासन संवेदनशील है, तो फिर पुलिस बल प्रयोग क्यों किया गया?
शहर की सड़कों की सफाई करने वाले कर्मचारी आज अपने अधिकारों की सफाई मांग रहे हैं। लेकिन जवाब अभी तक धुंधला है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच असली मुद्दा यही है कि शहर को साफ रखने वाले मजदूर खुद व्यवस्था से परेशान क्यों हैं — और क्या उनकी आवाज सुनने के बजाय अब डंडे से जवाब दिया जाएगा?





