साय सरकार के तीसरे बजट से अनियमित कर्मचारी निराश, फेडरेशन ने दी लंबी संघर्ष की चेतावनी

रायपुर। साय सरकार के तीसरे बजट में छत्तीसगढ़ के शासकीय कार्यालयों में कार्यरत अनियमित कर्मचारियों के लिए किसी भी प्रकार की घोषणा नहीं होने से कर्मचारियों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। आउटसोर्सिंग (प्लेसमेंट), सेवा प्रदाता, ठेका, समूह/समिति, जॉबदर, संविदा, दैनिक वेतनभोगी, कलेक्टर दर, श्रमायुक्त दर, मानदेय एवं अंशकालिक कर्मचारियों ने इसे अपने साथ उपेक्षा बताया है।
कर्मचारियों का कहना है कि वे प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, इसके बावजूद बजट में उनके लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया। उनका आरोप है कि जब भारतीय जनता पार्टी विपक्ष में थी, तब पार्टी के वरिष्ठ नेताओं एवं जनप्रतिनिधियों ने मंचों पर आकर अनियमित कर्मचारियों की समस्याओं को प्राथमिकता से हल करने का आश्वासन दिया था।

कर्मचारियों ने “मोदी की गारंटी 2023” के तहत जारी वचनबद्ध सुशासन पत्र का भी हवाला दिया है। उनका कहना है कि बिंदु क्रमांक 2 में अनियमित कर्मचारियों को शामिल करते हुए एक समिति गठन कर समीक्षात्मक प्रक्रिया प्रारंभ करने का उल्लेख किया गया था, लेकिन जारी समिति गठन आदेश में अनियमित कर्मचारियों का कोई जिक्र नहीं है।
फेडरेशन का आरोप है कि पिछले दो वर्षों में अनियमित कर्मचारियों के हित में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उल्टा कई विभागों में कर्मचारियों की छंटनी की जा रही है, वेतन लंबित है, संविदा अनुसार भुगतान नहीं हो रहा, न्यूनतम वेतन में आठ वर्षों से वृद्धि नहीं हुई है तथा कई विभागों में श्रम सम्मान राशि भी नहीं दी जा रही है।
छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी फेडरेशन के पदाधिकारियों ने कहा कि वे लगातार शासन-प्रशासन को आवेदन एवं निवेदन देते आ रहे हैं, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई। साय सरकार से बड़ी उम्मीदें थीं, परंतु अनदेखी से कर्मचारी आहत और आक्रोशित हैं।
फेडरेशन ने अपने सहयोगी संगठनों एवं प्रदेशभर के अनियमित कर्मचारियों से लंबी लड़ाई के लिए तैयार रहने की अपील की है। आने वाले दिनों में आंदोलन की रूपरेखा तय किए जाने के संकेत भी दिए गए हैं।




