झारखंड में कांग्रेस विधायकों पर संदेह, सोरेन को अपनी पार्टी के विधायकों पर नहीं?
कांग्रेस के अपने 17 विधायक हैं और एक प्रदीप यादव हैं, जो बाबूलाल मरांडी की पार्टी छोड़ कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। इनमें से दो-तिहाई यानी 12 विधायक अलग होकर एक गुट बना सकते हैं। जानकार सूत्रों का कहना है कि 12 से 15 विधायकों की बात अलग अलग स्रोत से भाजपा नेताओं से हुई है।

एम.डी. आरिफ की कलम से…….
झारखंड में सियासी उठापटक थमने का नाम नहीं ले रही है। सत्तारूढ़ गठबंधन जेएमएम और कांग्रेस के विधायकों को छत्तीसगढ़ ले जाकर एक रिसॉर्ट में रखा गया है। यह पहला मौका है कि जिस पार्टी की राज्य में सरकार है उसको अपने विधायक दूसरे राज्य में छिपाना पड़ा है। सवाल है कि किस कारण से जेएमएम और कांग्रेस ने विधायक दूसरे राज्य में भेजे? इसका कारण जेएमएम विधायक नहीं, बल्कि कांग्रेस विधायक हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अपनी पार्टी के विधायकों पर कोई संदेह नहीं है। इक्का-दुक्का ऐसे विधायक, जो पिछली बार भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर जेएमएम की टिकट से लड़े और जीते उन पर कुछ संदेह है लेकिन अपने ज्यादातर विधायकों को लेकर हेमंत सोरेन भरोसे में हैं। उनको कांग्रेस के विधायकों पर भरोसा नहीं है। तभी कांग्रेस के प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष के साथ विधायकों को छत्तीसगढ़ भेजा गया।

कांग्रेस के अपने 17 विधायक हैं और एक प्रदीप यादव हैं, जो बाबूलाल मरांडी की पार्टी छोड़ कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। इनमें से दो-तिहाई यानी 12 विधायक अलग होकर एक गुट बना सकते हैं। जानकार सूत्रों का कहना है कि 12 से 15 विधायकों की बात अलग अलग स्रोत से भाजपा नेताओं से हुई है।
यह भी कहा जा रहा है कि कई विधायकों ने दलबदल करने के लिए अपनी अपनी शर्तों पर समझौता कर लिया है। कई विधायकों को पैसे दिए जाने की खबर है। तीन विधायक पैसे के साथ पश्चिम बंगाल में पकड़े गए थे और जेल से छूटने के बाद भी वहीं हैं। उनके अलावा नौ-दस और विधायकों के बारे में खबर है कि वे भाजपा के संपर्क में हैं। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री जिस दिन गठबंधन के विधायकों के साथ पिकनिक पर गए उस दिन कांग्रेस विधायकों के हाव-भाव से उनको गड़बड़ी का अंदाजा हो गया था। इसलिए कांग्रेस के प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष को साथ भेजने का फैसला हुआ। इसके बावजूद जेएमएम को कांग्रेस विधायकों के पाला बदलने का खतरा दिख रहा है।



