12. इस वजह से बिग-बॉस कंटेस्टेंट अब्दु रोज़िक की नहीं बढ़ी हाइट, 19 वर्ष में भी दिखते हैं बच्चे जैसे

टीवी का सबसे लोकप्रिय रियलिटी शो बिग-बॉस 16 कई मामलों में खास है, इस बार लोगों के लिए सबसे बड़े आकर्षण का केंद्र हैं केटेस्टेंट- अब्दु रोज़िक। मूल रूप से तजाकिस्तान के रहने वाले अब्दु रोज़िक न सिर्फ बिगबॉस के घर में बल्कि दर्शकों की भी पहली पसंद हैं। अब्दु के बोलने का तरीका उन्हें काफी खास बनाता है। वैसे तो अब्दु रोजिक की उम्र 19 साल है पर वह देखने को 4-5 साल के बच्चे की तरह हैं, रोज़िक सिर्फ 94 सेंटीमीटर लंबे हैं। पांच साल की उम्र के बाद अब्दु की लंबाई बढ़ना बंद हो गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वह ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी के शिकार हैं, उन्हें रिकेट्स की भी समस्या है जिसके कारण उम्र बढ़ने के साथ उनकी लंबाई नहीं बढ़ पाई।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक ग्रोथ हार्मोन में कमी के कारण अब्दु रोज़िक को जो समस्या है ऐसा किसी भी बच्चे को हो सकता है। इसके अलावा अब्दु को रिकेट्स नामक एक और बीमारी है। इस तरह की समस्याओं का असर मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है।
बिग-बॉस के दौरान अब्दु ने बताया कि स्कूल में उन्हें अलग नजर से देखा जाता है। एक बच्चे ने उन्हें धमकाया जिसके चलते वह पढ़ाई भी नहीं कर पाए, माता-पिता के पास इतने पैसे नहीं थे कि वे अब्दु का इलाज करा पाते। आइए जानते हैं कि ग्रोथ हार्मोन में कमी की समस्या क्यों होती है और इससे बचाव के लिए क्या किया जा सकता है?
ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी की समस्या
ग्रोथ हार्मोन की कमी (जीएचडी) व्यक्ति में बौनेपन का कारण बन सकती है। जीएचडी वाले बच्चों का कद सामान्य शरीर के अनुपात में छोटा रह जाता है, यह समस्या जन्मजात हो सकती है या फिर इसके बाद में भी विकसित होने का खतरा रहता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पिट्यूटरी ग्रंथि द्वारा बहुत कम मात्रा में ग्रोथ हार्मोन के उत्पादन के कारण इस तरह की दिक्कत हो सकती है। इस तरह की समस्या के कई कारण हो सकते हैं। यह आनुवंशिक दोष, मस्तिष्क की गंभीर चोट या जन्म से ही पिट्यूटरी ग्रंथि न होने के कारण होने वाली दिक्कत के कारण भी हो सकती है। एक अनुमान के मुताबिक करीब सात हजार नवजात में से एक में इस प्रकार के विकारों का जोखिम होता है। आइए इस समस्या के बारे में विस्तार से समझते हैं।
ग्रोथ हार्मोन में कमी के क्या कारण हैं?
अब्दु रोज़िक में उन हार्मोन्स की कमी है जो शरीर की वृद्धि के लिए आवश्यक होते हैं, इस कमी के कई कारण हो सकते हैं। वैसे तो इसका खतरा जन्मजात होता है पर कुछ बच्चों में मस्तिष्क में ट्यूमर के कारण भी यह दिक्कत बाद में हो सकती है। ट्यूमर आमतौर पर पिट्यूटरी ग्रंथि या मस्तिष्क के पास के हाइपोथैलेमस क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है जिससे हार्मोन्स का स्राव प्रभावित हो जाता है। ऐसे विकारों में शरीर की लंबाई कम रह जाना, सबसे सामान्य माना जाता है, यह लड़कियों में स्तन के विकास या भी यौनावस्था से संबंधित कई तरह की समस्याओं को भी बढ़ाने वाली हो सकती है।
ग्रोथ हार्मोन में कमी का पता कैसे चलता है?
यदि आपका बच्चा, उम्र के हिसाब से नहीं बढ़ पा रहा है या फिर उसका बौद्धिक विकास कम है तो इसे ग्रोथ हार्मोन में कमी के तौर पर देखा जा सकता है। डॉक्टर्स बताते हैं, रक्त परीक्षण के माध्यम से उन प्रोटीन के स्तर को मापा जाता है जो ग्रोथ हार्मोन फ़ंक्शन के मार्कर हैं, लेकिन यह बहुत सटीक परीक्षण नहीं है। स्थिति का सही निदान करने के लिए डॉक्टर कुछ विशिष्ट जांच की सलाह दे सकते हैं जिससे पता लगाया जा सके कि समस्या क्या है? स्थिति का पता चलने पर हार्मोनल थेरेपी के माध्यम से इसका इलाज किया जा सकता है, हालांकि इसके कई प्रकार के दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं।
ग्रोथ हार्मोन में कमी के अलावा अब्दु को रिकेट्स की भी समस्या है, आइए इस बारे में भी जानते हैं।
रिकेट्स क्या होता है?
रिकेट्स बच्चों में हड्डियों के नरम और कमजोर होने की समस्या है, आमतौर पर विटामिन डी की कमी के कारण यह दिक्कत होती है, इसके भी आनुवांशिक जोखिम हो सकते हैं। रिकेट्स की समस्या भी दुर्लभ है।
विटामिन-डी, शरीर को भोजन से कैल्शियम और फास्फोरस को अवशोषित करने में मदद करता है। पर्याप्त विटामिन-डी न होने से हड्डियों में उचित कैल्शियम और फास्फोरस के स्तर को बनाए रखना मुश्किल हो जाता है, जिसके कारण वह कमजोर हो जाती है और उनका विकास भी प्रभावित हो जाता है। रिकेट्स के कारण हड्डियों के आसानी से टूटने का भी खतरा रहता है।



