छत्तीसगढ़

1. प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी कलाकार अमृता बारले का निधन, कला जगत में शोक की लहर

दुर्ग।   ख्यातिलब्ध छत्तीसगढ़ी कलाकार अमृता बारले का निधन हो गया है. उनकी निधन की खबर से छत्तीसगढ़ के कला जगत में शोक की लहर है. अमृता बारले मिनीमाता राज्य अलंकरण और राष्ट्रपति से सम्मनित थी. अमृता बारले ने 65 वर्ष में दुनिया को अलविदा कह दिया है. बताया जा रहा है कि वे दो माह से बीमार थी, उनका मेडिकल कालेज के आईसीयू में इलाज चल रहा था. उनका अंतिम संस्कार कल रिसाली मुक्तिधाम में होगा.

सुश्री अमृता बारले 65 वर्षीय महिला राष्ट्रीय कलाकार का जन्म सन् 2 मई 1958 में छत्तीसगढ़ के ग्राम बठेना, विकासखंड पाटन, जिला दुर्ग में हुआ था. अमृता बारले की बठेना गांव (दुर्ग) से 9 वर्ष की उम्र में सन् 1970 से 2023 तक कला यात्रा रही. उन्होंने छत्तीसगढ़ के मशहूर वरिष्ठ लोक गायक बैतल राम साहू के साथ प्रमुख लोक गीत गायी, जिसमें (1) तोला बंदत हंव बाबा, जय सतनाम .चंदैनी तर्ज (2) कइसे करों मैं मया के बखान. मैं तो जीयत हांवों जोड़ी मोर तोरे च खातिर (3) मोर बासी के खवाइया कहां गए रे. ये प्रसिद्ध गीत आज भी लोगों के दिल को छू लेती है.

बता दें कि विगत दिनों अमृता बारले का अचानक स्वास्थ्य खराब हो गया था, जिसके बाद शंकराचार्य हॉस्पिटल जुनवानी, भिलाई के आईसीयू में उन्हें भर्ती कराया गया था. जहां वे जिंदगी और मौत से लड़ रहीं थी. वहीं अमृता बारले का 12 अक्टूबर 2023 को शाम लगभग 4 बजे निधन हो गया. कल पूर्वान्ह 12 बजे तक पार्थिव नंदी शरीर की अंतिम दर्शन के लिए उनके निज निवास आशीष नगर भिलाई में रखा जाएगा., उसके बाद रिसाली मुक्तिधाम में उनका अंतिम सस्कार होगा.

Related Articles

Back to top button