जम्मू में वोट काटने का काम करेंगे गुलाम नबी आजाद
उनके सामने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह की तरह राजनीति करने का मौका है।

गुलाम नबी आजाद ने अपनी राजनीति पहले ही शुरू कर दी थी। कांग्रेस नेतृत्व को चिट्ठी लिख कर नाराजगी जताने वाले जी-23 समूह के नेताओं को जम्मू में जुटा कर अपना सम्मान कराने के समय ही उन्होंने इरादा जाहिर कर दिया था। वे उसी समय से अपने समर्थकों को जुटा रहे थे। उनके सामने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह की तरह राजनीति करने का मौका है। वे कैप्टेन ने भी पार्टी बना कर भाजपा से तालमल किया था। यह अलग बात है कि उनकी पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई। लेकिन भाजपा के साथ उनके संबंध बहुत अच्छे हो गए हैं और अब वे कहीं राज्यपाल आदि बनने की चर्चा में शामिल हैं।

उसी तरह की राजनीति गुलाम नबी आजाद भी करेंगे लेकिन फर्क यह होगा कि उनका भाजपा के साथ चुनाव पूर्व तालमेल नहीं होगा। उनका मकसद जम्मू संभाग में मुस्लिम वोट बांटने का होगा। वे कांग्रेस, नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी के वोट में कुछ हिस्सा लेंगे ताकि जम्मू में भाजपा की सभी सीटें जीतने की रणनीति सफल हो। परिसीमन के जरिए जम्मू में 43 सीटें कर दी गई हैं। अब गैर कश्मीरी लोगों को भी विधानसभा चुनाव में वोट देने का अधिकार दिया जा रहा है। परिसीमन और प्रवासियों के वोटिंग राइट्स के आधार पर भाजपा जम्मू की सभी सीटें जीतने की उम्मीद कर रही है। इस काम में गुलाम नबी आजाद मदद करेंगे।
बदले में उनको दिल्ली का मकान मिला रहेगा। पिछले साल राज्यसभा से रिटायर होने के बाद से लगातार उनके मकान का एक्सटेंशन हो रहा है। उनको पद्म विभूषण से सम्मानित भी किया गया। उनके रिटायरमेंट पर प्रधानमंत्री उनके लिए भावुक भी हुए थे। आगे हो सकता है कि भाजपा का जम्मू कश्मीर में हिंदू मुख्यमंत्री बनाने का प्लान सफल हो जाए तो आजाद को भी इनाम मिले। वे कहीं राज्यपाल आदि बना दिए जाएं।



