छत्तीसगढ़

5. जानें क्या है छत्तीसगढ़ का अनोखा त्‍यौहार छेरछेरा, किसान करते हैं ये काम

रायपुर।   छेरछेरा छत्तीसगढ़ का अनोखा त्योहार है। यह त्यौ‍हार छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध और लोक पारंपरिक त्यौहारों में से एक है।

इस दिन किसान अपनी मेहनत से कमाए अन्न या धन को दान में देकर त्यौहार मनाते हैं।

पूरे प्रदेश में छेरछेरा त्यौहार सभी वर्ग जाति एवं सम्प्रदाय के लोग इसे बड़े ही सादगी और हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं।

कब मनाया जाता है त्यौहार

छेरछेरा त्यौहार के लिये पौष माह की पूर्णिमा तिथि के ही दिन और रात को शुभ माना जाता है।

इस साल यह पूरे प्रदेश में आज यानी 25 जनवरी को मनाया जा रहा है।

दान का पर्व है छेरछेरा

छत्तीसगढ़ में जब किसान अपने खेतों से फसल को काट एवं मींजाई कर अपने घरों में भंडारण कर चुके होते हैं। तब यह पर्व पौष माह की पूर्णिमा तिथि यानी जनवरी के महीने में मनाते हैं।

दान देना महा पुण्य का कार्य होता है। इसलिए प्रदेश के लोग इस पर्व को दान देने के रूप में मनाते हैं।

बच्चे घर-घर जाकर मांगते हैं दान

इस दिन बच्चे अपने गांव के सभी घरों में टोलियों में जाकर छेरछेरा कहकर अन्न का दान मांगते हैं। लोग अपने घरों में रखें अन्न इन बच्चों को दान स्वरूप देते हैं।

बच्चों के अलावा महिलाएं, पुरुष और बुजुर्ग भी छेरछेरा दान मांगते हैं।

सीएम साय ने दी छेरछेरा की बधाई

सीएम विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर बधाई दी है। सीएम ने पोस्ट में लिखा कि आ गे हे छेरछेरा, कोठी के धान ला हेरव संगवारी अब खुश हो ही छत्तीसगढ़ के किसान, जब 21 क्विंटल प्रति एकड़ अउ 3100 रु. क्विंटल के हिसाब से भाजपा सरकार खरीदही धान।

दूधाधारी मठ मंदिर पहुंचे भूपेश बघेल

पूर्व सीएम भूपेश बघेल रायपुर के दूधाधारी मठ मंदिर पहुंचे और छेरछेरा कार्यक्रम में शामिल हुए।

बघेल ने कहा आज के दिन दान देने और लेने की परंपरा है, हर बार में आता हूं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button