छत्तीसगढ़

6. फल या फल का जूस, किसे चुनेंगे आप, जानिए किसमें कितना है दम

फ्रूट्स का सेवन हमें सेहतमंद बनाता है, विशेषज्ञों का मत है कि प्रतिदिन मौसमी फलों का सेवन करना चाहिए। सुबह के एक गिलास फल के जूस का सेवन स्वस्थ तरीका माना जा सकता है, लेकिन आपको यह जानकार हैरानी होगी कि किसी भी फल के जूस से ज्यादा पौष्टिक फल होता है। सीधा फल खाना ज्यादा फायदेमंद होता है, बजाय उसका जूस निकालकर पीना।

फल और उसका जूस, स्वाद में भले ही एक जैसे हो, लेकिन फायदे में जूस से ज्यादा फल पोष्टिक माना जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक जूस निकालने से सभी फाइबर निकल जाते हैं और कैलोरी, एसिड सामग्री और चीनी अधिक हो जाती है, जिससे ये फल के मुकाबले कम फायदा करते हैं। फाइबर निकलने से बैलेंस बिगाड़ जाता है और पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। ऐसे में यदि आपको कोई जूस या फल चुनने को कहें तो आपको फल चुनना चाहिए। डॉक्टर भी जूस की जगह ताजे फल खाने की सलाह देते हैं। जानिए वे ऐसा क्यों कहते हैं।

फल सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर, जूस कई प्रक्रियाओं से गुजरता है
फलों के रस को कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है, जिसके कारण इसमें से कई सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे विटामिन ए और विटामिन सी आदि निकल जाते हैं। फल हम इसलिए ही खाते हैं, क्योंकि इसमें पोषक तत्व होते हैं, ऐसे में सीधे फल खाने चाहिए।
फल में फाइबर ही फाइबर, जूस से सब गायब
पाचन को दुरस्त रखने के लिए फाइबर बेहद महत्वपूर्ण होता हैै। आपने महसूस किया होगा कि फल के सेवन से आपका पेट भरा—भरा रहता है, वहीं जूस पीने के बाद कुछ ही देर में भूख लगने लगती है। इसका मुख्य कारण फाइबर है। जूस से फलों का सारा फाइबर फिल्टर हो जाता है।
जूस में शुगर की मात्रा अधिक, फल में संतुलित
अगर आप पैक्ड जूस का सेवन करते हैं तो यह फायदे की जगह नुकसानदायक हो सकता है। पैकेज्ड फलों के रस में फलों का स्वाद और अतिरिक्त चीनी अधिक होती है। इससे शरीर का शुगर लेवल बढ़ सकता है। डायबिटीज के मरीजों को इसके सेवन से बचना चाहिए।

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