छत्तीसगढ़

7. Ramadan 2023: रोज़ा में सहरी की सही डाइट से लेकर इफ़्तार का हेल्दी तरीका तक, स्वामी रामदेव से जानें

रोज़ा है रूह की ग़िज़ा, सेहत हज़ार है

माहे रमज़ान कल से शुरू हो रहा है। इस पाक महीने में बंदे रोज़ा और इबादत से अपने रब को राज़ी करने की कोशिश करेंगे क्योंकि कहते हैं रमज़ान में खुदा की खास रहमत बरसती है। मैंने तो सुना है, इस महीने में हर एक नेकी के बदले 70 नेकियां मिलती हैं। ये सही बात है नेकियां तो ज़्यादा मिलती ही हैं खुदा के लिए भूखे-प्यासे रहने वाले रोज़ेदारों के गुनाह भी माफ किए जाते हैं। मार्च का ये महीना दोनों ही धर्मों के लिए खास है नवरात्र के व्रत शुरू हो चुके है और कल से रोज़े भी शुरू हो जाएंगे।

देखिए रमज़ान में रोजा रखना, नवरात्रि में उपवास करना ऊपर वाले की इबादत का एक तरीका तो है ही सेहत के लिहाज से भी फायदेमंद है क्योंकि रमज़ान में 14-15 घंटे बिना कुछ खाए-पीए निर्जला उपवास रखा जाता है जिस दौरान शरीर खुद से अपने आप को करेक्ट करता है।
इस प्रोसेस में बॉडी पुराने सेल्स को ब्रेक कर दोबारा इस्तेमाल करती है जिससे वो सेल्स और ज़्यादा प्रभावी तरीके से काम करते हैं।

शरीर के अंदर के इस क्लीनिंग प्रोसेस में छोटी-छोटी बीमारी से लेकर कैंसर सेल्स तक खत्म होते हैं। इसलिए 30 दिन के रोजे रोज़ेदार के सब्र का इम्तिहान तो लेते ही है उनको फिजिकली औऱ मेंटली स्ट्रॉन्ग भी बनाते हैं। वाकई फास्टिंग के तमाम फायदे हैं लेकिन, जरूरी है कि वो सही तरीके से की जाए क्योंकि फास्टिंग का सीधा कनेक्शन बॉडी की तीन इनटर्नल एनर्जी से जुड़ा है। यानि वात पित्त और कफ से जिसका बैलेंस बिगड़ने से शरीर फौरन रिएक्ट करने लगता है।

सहरी में गलत खाना खा लें तो दिनभर खट्टी डकार,कब्ज़, एसिडिटी,बेचैनी रहती है, रोज़े में ध्यान ना रखा जाए तो, डिहाइड्रेशन चक्कर थकान कमज़ोरी लगने लगती है। इफ्तार में फौरन ठंडी चीज़ें खाने-पीने पर खांसी-ज़ुकाम, गले में दर्द जैसी दिक्कतें हो जाती हैं। इसलिए सही तरीके से फास्टिंग ज़रूरी है ताकि वात पित्त कफ का बैलेंस ना बिगड़े, त्रिदोष शांत रहे और इसमें योग काफी हद तक मददगार साबित हो सकता है।
तो, योग के साथ कैसे रखें  रोज़े और उपवास ये आज स्वामी रामदेव से जानते हैं।

सहरी की डाइट

दूध पीएं
खजूर खाएं
फलों का जूस पीएं
दूध-सेवईं खाएं
ड्राई फ्रू्ट्स खाएं

रोज़ा कैसे खोलें

गुनगुने नमकीन पानी से रोज़ा खोलें
गुनगुने पानी से फूड पाइप क्लियर
शुरुआत खजूर से करें
बर्फ वाली चीज़ों से परहेज़ करें

इफ्तार में क्या खाएं

मौसमी फल खाएं
नींबू-पानी पीएं
शरबत पीएं
तला भुना ना खाएं
ज़्यादा खाने से बचें
हरी सब्ज़ी खाएं
सलाद खाएं

कफ के रोग

मोटापा
थायरॉयड
सर्दी,खांसी,जुकाम

मोतियाबिंद
कम सुनाई देना
आंखों का लाल होना
डार्क सर्कल होना

पित्त के रोग

एसिडिटी होना
अल्सर होना
बार-बार डकार आना
हिंचकियां आना
जॉन्डिस होना

वात के रोग

घुटने में दर्द होना
हड्डियों में कैविटी
शरीर में तेज दर्द
पैर में ऐंठन होना
स्किन का रफ होना
शरीर कमजोर होना

वात की परेशानी, जूस है कारगर

हरसिंगार
निरगुंडी
एलोवेरा

वात दोष बैलेंस

हल्दी
मेथी
सौंठ
लहसुन

कफ दोष बैलेंस

श्वासारि काढ़ा
दूध-पिपली
त्रिकुटा पाउडर
हल्दी-दूध-शिलाजीत

पित्त दोष बैलेंस, जूस पीएं
एलोवेरा
लौकी
व्हीटग्रास

पित्त दोष बैलेंस
घी में लहसुन पकाकर खाएं
हल्दी,मेथी,सौंठ पाउडर लें

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