छत्तीसगढ़

15 फीट की ऊंचाई से गिरे दो मजदूर, एक की मौत! आखिर मजदूरों की सुरक्षा का जिम्मेदार कौन?

बिलासपुर में पुराने मकान का छज्जा तोड़ते समय दर्दनाक हादसा, सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल; परिजनों ने मकान मालिक और ठेकेदार पर लगाए लापरवाही के आरोप

एम. डी. आरिफ की रिपोर्ट…

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पुराने मकान को तोड़ने के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। सरकंडा थाना क्षेत्र के कपिल नगर में मकान का छज्जा तोड़ते समय करीब 15 फीट की ऊंचाई से दो मजदूर नीचे गिर गए। इस हादसे में नरेंद्र साहू की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि दूसरा मजदूर गंभीर रूप से घायल है। घटना ने निर्माण और तोड़फोड़ के काम में मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
15 फीट की ऊंचाई से गिरकर गई एक मजदूर की जान
जानकारी के अनुसार, कपिल नगर में एक पुराने मकान का छज्जा तोड़ने का काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक दो मजदूर करीब 15 फीट की ऊंचाई से नीचे गिर पड़े। दोनों को गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद उन्हें तत्काल सिम्स अस्पताल ले जाया गया। यहां इलाज के दौरान नरेंद्र साहू ने दम तोड़ दिया, जबकि दूसरे मजदूर का उपचार जारी है।

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सुरक्षा बेल्ट और हेलमेट कहां थे?

हादसे के बाद मृतक के परिजनों ने मकान मालिक और ठेकेदार पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि ऊंचाई पर काम कराने के बावजूद मजदूरों को सुरक्षा बेल्ट और हेलमेट जैसे आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए थे।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मजदूरों से 15 फीट की ऊंचाई पर काम कराया जा रहा था, तो उनकी सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए थे? क्या काम शुरू करने से पहले जोखिम का आकलन किया गया था? क्या मजदूरों को सुरक्षित तरीके से काम करने के लिए आवश्यक उपकरण और व्यवस्था उपलब्ध कराई गई थी?
हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही हुई या नहीं, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
मजदूर की मौत के बाद कौन लेगा जिम्मेदारी?
मजदूर दिनभर मेहनत करके अपने परिवार का पेट पालते हैं। ऐसे में काम के दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। यदि ऊंचाई पर काम करते समय आवश्यक सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी की गई है, तो यह गंभीर मामला है।
अब सवाल यह है कि क्या इस हादसे की निष्पक्ष जांच होगी? क्या मकान मालिक और ठेकेदार की भूमिका की पड़ताल कर जिम्मेदारी तय की जाएगी? और यदि जांच में लापरवाही सामने आती है, तो क्या संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी?
पुलिस जांच में जुटी
घटना के बाद सरकंडा थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ ही परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज कर रही है। मकान मालिक और ठेकेदार की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
बड़ा सवाल: मजदूरों की जान की कीमत कौन समझेगा?
बिलासपुर की यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि निर्माण और तोड़फोड़ के कार्यों में सुरक्षा को नजरअंदाज करना कितना गंभीर साबित हो सकता है। अब जरूरी है कि हादसे के कारणों की निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदारी तय की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
अमन प्रकाश न्यूज़ का सवाल है—क्या मजदूरों की सुरक्षा केवल कागजों तक सीमित रह जाएगी, या उनकी जान बचाने के लिए जमीन पर भी पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे?

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