छत्तीसगढ़
4. जज्बे को करें सलाम, इनकी कुर्बानियों के कारण आजाद हवा में जी रहे हम, जानिए छत्तीसगढ़ के बहादुर सैनिकों की वीरगाथा

बिलासपुर. आज आप को हम बता रहे है कि जिले के उन जाबाज सौनिकों के बारे में जिन्होंने हम सुकून से सांस ले सकें इसके लिए अपनी सांसें दांव पर लगा दी।
वीर शहीद एएसडब्ल्यूआर धनंजय सिंह
मुंगेली पांडरभट्टा निवासी एएसडब्ल्यूआर धनंजय सिंह की पोस्टिंग जम्मू एंड काश्मीर के वारपुर कुपवाड़ा सेक्टर में पोस्टिंग थी। वर्ष 2001 में एएसडब्ल्यूआर धनंजय सिंह अपनी टीम के साथ आरपेशन रक्षक को अंजाम देने के लिए साथियों के साथ गस्त पर निकले थे।
24 राष्ट्रीय राइफल्स एक्स 54 सीएवी की टीम 15 जुलाई 2001 को लगभग 2.30 बजे वारपुर जीआर-192445 पेट्रोलिंग के दौरान आतंकवादियों के साथ देश की सुरक्षा के लिए लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए
26 जनवरी पर होने वाला था अटैक, जवान ने बंकर उड़ाया…
पुरुषोत्तम कुमार चंद्रा पैरा कमांडो थे। वर्ष 2000 में उनकी बटालियन को सूचना मिली कि श्रीनगर के पूंछ सेक्टर में बड़ा आंतकी हमला होने वाला है। पुरषोत्तम कुमार चंद्रा की टीम श्रीनगर पहुंच गई। टीम को सूचना मिली कि आंतकवादी संगला पाकिस्तान में पहाड़ों की तराई में छिपे हुए हैं और 26 जनवरी को वारदात को अंजाम की योजना तैयार कर चुके हैं। 23 जनवरी को पुरुषोत्तम अपनी टीम के साथ संगला के पास भारतीय सीमा पर पेट्रोलिंग कर रहे थे। इस दौरान अचानक से पाकिस्तानी आंतकवादियों ने फायरिंग शुरू कर दी। इस दौरान पाकिस्तानी बंकर से भी फायरिंग होने लगी। पाकिस्तानी फायरिंग में पुरुषोत्तम चंद्रा के दोनों पैर में गोली लगी, घायल होने के बाद भी जवान ने राकेट लांचर से फायर कर पाकिस्तानी बंकर को तबाह कर दिया। पुरुषोत्तम चंद्रा अब रिटायर्ड होकर सैनिक व पुलिस विभाग में भर्ती होने का सपना देखने वालों को निशुल्क ट्रेनिंग देकर देश सेवा में लगे हुए हैं।



