7. World Bicycle Day 2023: डायबिटीज के पेशेंट साइकिल चला सकते हैं? एक्सपर्ट से जानें किन 4 बातों का रखें ध्यान

भारत में लगभग 77 मिलियन लोग डायबिटीज से ग्रस्त हैं. राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के अनुसार, 2030 तक इस बीमारी से पीड़ित होने वाले लोगों की संख्या 79.4 मिलियन के करीब होगी. वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने कई कारकों की जांच की है (जैसे आहार और जीवनशैली), जो इस समस्या को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. सरल शब्दों में कहें तो डायबिटीज को ‘ह्यूमन एनर्जी क्राइसिस डिसॉर्डर’ कहा जा सकता है. टाइप 1 का मतलब है शरीर कोई इंसुलिन नहीं बना सकता. यह हार्मोन होता है, जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है. टाइप 2 का मतलब है कि शरीर इंसुलिन पर्याप्त मात्रा में नहीं उत्पन्न कर सकता है या उत्पन्न हो रहा इंसुलिन पर्याप्त रूप से कार्य नहीं कर पाता है. इंसुलिन आपके ब्लड ग्लूकोज लेवल को मैनेज करता है. आपके आहार के ग्लूकोज को कोशिकाओं में ले जाता है. इस ग्लूकोज लेवल के बिना ये शुगर अंगों और ऊतकों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देते हैं. यदि उपचार न किया जाए तो वे घातक हो जाते हैं.
अक्सर डायबिटीज के मरीज हाई इंटेंसिटी वाली एक्टिविटीज करने से बचते हैं. उन्हें लगता है कि वे इस तरह की एक्टिविटीज को आसानी से नहीं कर सकते. ऐसे में यहां ये सवाल उठता है कि क्या डायबिटीज पेशेंट के लिए किसी भी हाई इंटेंसिटी वाली एक्टिविटी जैसे साइकलिंग करना कठिन होता है? क्या डायबिटीज होने पर इस तरह की एक्टिविटी करने से बचना चाहिए? बीटओ के फाउंडर एंड सीईओ गौतम चोपड़ा कहते हैं, नहीं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. बेशक, जिन्हें डायबिटीज नहीं है, उनके मुकाबले डायबिटीज पेशेंट के लिए चुनौती दोगुनी हो सकती है, लेकिन उचित कदमों के साथ इस चुनौती को आसानी से पूरी भी की जा सकती है. साइकिल चलाना डायबिटीज के मरीजों के लिए एक बेहतरीन गतिविधि है. चाहे आप एक खिलाड़ी हों या शौकिया साइक्लिस्ट, यहां कुछ महत्वपूर्ण तरीके बताए गए हैं, जिन्हें आप अपनी दिनचर्या में शामिल करते हुए बिना चिंता किए इस तीव्र गतिविधि वाले कार्य को आराम से कर सकते हैं.
व्यक्तिगत योजना बनाएं
अगर आप राइड पर निकलने की सोच रहे हैं तो सबसे पहले अपने डॉक्टर से राय लें. वो आपकी साइकलिंग और एक्सरसाइज के लक्ष्यों के अनुरूप एक योजना बनाने में मदद करेंगे. इसे डायबिटीज मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म के जरिए आसानी से किया जा सकता है. बेहतर ट्रेनिंग टाइम, आवश्यक डाइट, स्वयं निगरानी कैसे करें, इन सब के लिए मदद करेगी. जब आप इसके लिए एक बार तैयार हो जाएंगे, तो आप 1 घंटे से भी अधिक समय के लिए साइकलिंग कर सकेंगे.
ब्लड शुगर लेवेल मॉनिटर करें
साइकलिंग एक ऐरोबिक एक्सरसाइज है, जिसकी मात्रा आपके ग्लूकोज़ लेवल की तीव्रता पर निर्भर करती है. इसका अर्थ है कि आपका ब्लड शुगर लेवल किसी भी समय बदल सकता है. यदि आप डायबिटिक राइडर हैं और एक रेस में हिस्सा ले रहे हैं, तो राइड की शुरुआत पर और पूरी रेस के दौरान आपके ब्लड शुगर में अंतर देखी जा सकती है. ऐसे में यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने शरीर के ग्लूकोज के प्रति विभिन्न प्रतिक्रियाओं को समयावधि के दौरान ध्यान में रखें. पहले से निश्चित ट्रैक और साइकलिंग के साथ छोटी अवधि में अभ्यास करें. अपने ब्लड शुगर की जांच करें. व्यायाम से पहले और बाद में ब्लड शुगर को ट्रैक करने के लिए ग्लूकोमीटर का प्रयोग करना अच्छा होता है.
अपने शरीर को भरपूर पोषण दें
साइकिल चालने की शुरुआत से लेकर अंत तक, आपको अपने शरीर के संकेतों पर ध्यान देना होगा. कम शुगर लेवल को नियंत्रित करने के लिए कार्बोहाइड्रेट सोर्स जैसे स्नैक्स या ग्लूकोज टैबलेट्स को साथ रखना चाहिए. डिहाइड्रेशन से बचने के लिए पर्याप्त पानी पिएं वरना ब्लड शुगर लेवल पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. बैलेंस डाइट को प्राथमिकता देने, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और हेल्दी फैट के संयोजन के साथ-साथ, ब्लड शुगर को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी, साथ ही शरीर में ऊर्जा भी बरकरार रहेगी.
जरूरी चीजों को साथ रखें
साइकलिंग के दौरान अपने ग्लूकोमीटर, टेस्ट स्ट्रिप, इंसुलिन, सिरिंज या इंसुलिन पेन और अन्य जरूरी दवाओं जैसी आवश्यक सामग्री को साथ रखें. किसी भी एक्टिविटी को शुरुआत में कम करें. धीरे-धीरे समय सीमा बढ़ाएं. ब्लड शुगर लेवल और एक्सरसाइज की अवधि के लिए उचित निर्णय लें. शरीर को फिट और स्वस्थ रखने के लिए साइकलिंग एक शानदार तरीका है. ऐसे में ‘विश्व साइकलिंग दिवस’ पर आपको इसकी शुरुआत करनी चाहिए.



