छत्तीसगढ़

वार्ड 54 में अवैध प्लाटिंग पर बड़ा खेल? पार्षद को बिना बुलाए महापौर की बैठक से उठे कई सवाल

मीनल चौबे ने नगर निगम कार्यालय में वार्ड क्रमांक 54 में चल रही अवैध प्लाटिंग को लेकर टीपी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की बैठक ली। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि जिस वार्ड को लेकर बैठक आयोजित की गई, उसी वार्ड की पार्षद की मौजूदगी के बिना बैठक को अंजाम दे दिया गया। अब इस पूरे मामले को लेकर वार्ड की जनता और स्थानीय लोगों के बीच कई बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार वार्ड 54 में लंबे समय से अवैध प्लाटिंग का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। खेतों और जमीनों को नियमों के विरुद्ध काटकर प्लॉट बेचे जा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक कार्रवाई के नाम पर केवल बैठकें करते नजर आ रहे हैं।
क्या वार्ड पार्षद को जानबूझकर रखा गया दूर?


सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या वार्ड पार्षद को बैठक में बुलाना जरूरी नहीं समझा गया, या फिर जानबूझकर उन्हें दूर रखा गया?
यदि वार्ड की जनप्रतिनिधि बैठक में मौजूद नहीं थीं, तो आखिर क्षेत्र की वास्तविक स्थिति और जनता की समस्याओं को कौन सामने रखता?
अब लोगों के बीच चर्चा है कि कहीं यह बैठक सिर्फ खानापूर्ति और मीडिया मैनेजमेंट का हिस्सा तो नहीं थी।
अवैध प्लाटिंग पर उठे चार बड़े सवाल
पहला सवाल
क्या वार्ड पार्षद को पहले से अवैध प्लाटिंग की जानकारी थी और वह अब तक अनजान बनी हुई थीं?
दूसरा सवाल
क्या क्षेत्र के पटवारी को अवैध प्लाटिंग की जानकारी थी?
यदि थी तो क्या इसकी शिकायत तहसीलदार से की गई?
और यदि शिकायत हुई तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
तीसरा सवाल
क्या नगर निगम और पुलिस प्रशासन को जानकारी होने के बावजूद भी कार्रवाई शुरू नहीं की गई?
यदि सब कुछ सामने था तो आखिर इतने दिनों तक जिम्मेदार अधिकारी चुप क्यों बैठे रहे?
चौथा सवाल
क्या संबंधित जोन कमिश्नर को पूरे मामले की जानकारी थी?
यदि जानकारी थी तो अब तक अवैध प्लाटिंग पर रोक क्यों नहीं लगाई गई?
जनता में भारी आक्रोश
वार्ड 54 की जनता अब खुलकर नगर निगम प्रशासन पर सवाल उठा रही है। लोगों का कहना है कि अवैध प्लाटिंग का खेल बिना अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों की मिलीभगत के संभव नहीं है।
क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि गरीबों के छोटे मकानों पर बुलडोजर चलाने वाला निगम क्या बड़े भू-माफियाओं पर भी उतनी ही सख्ती दिखाएगा?
क्या टूटेंगे अवैध मकान?
अब सबकी नजर नगर निगम की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
क्या अवैध प्लाटिंग में बने सभी मकानों पर कार्रवाई होगी?
क्या बड़े जमीन कारोबारियों पर एफआईआर दर्ज होगी?
या फिर हमेशा की तरह गरीबों को निशाना बनाकर कार्रवाई का दिखावा किया जाएगा?
फिलहाल महापौर द्वारा की गई बैठक खुद सवालों के घेरे में आ गई है। जनता जवाब चाहती है और आने वाले समय में इस मुद्दे को लेकर बड़ा आंदोलन खड़ा होने की संभावना भी जताई जा रही है।

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