छत्तीसगढ़

2. धमतरी की लंबी छलांग, ये सुविधा देने वाला पहला जिला बना धमतरी, किसानों की होगी बल्ले-बल्ले

धमतरी:  चाहे रक्षा क्षेत्र या फिर कृषि विज्ञान का क्षेत्र, ड्रोन तकनीक आज हर क्षेत्र में हमारी जरूरत बनता जा रहा है. भारत सरकार ने तो इस तकनीक को महिला सशक्तिकरण का एक बड़ा हथियार ड्रोन दीदी के रुप में बना दिया है. सरकार की कोशिश है कि कृषि को आधुनिक और उन्नत बनाने के लिए महिला समूहों को ड्रोन उड़ाने और उसके इस्तेमाल करने की तकनीक सिखाई जाए. छत्तीसगढ़ सहित देश के कई राज्यों में महिलाएं ड्रोन की मदद से खेतों में दवा और उर्वरकों का छिड़काव भी कर रही हैं. इतना ही नहीं ड्रोन दीदी अब दूसरी बहनों को भी ड्रोन उड़ाने की ट्रेनिंग तक दे रही हैं.

धमतरी की लंबी छलांग

कृषि प्रधान जिले धमतरी में भी ड्रोन तकनीक के जरिए खेती किसानी के काम को आसान और उन्नत बनाया जा रहा है. आधुनिक तकनीक को अपनाने की दिशा में धमतरी जिला अब मॉडल जिला के रुप में डेवलप हो रहा है. जिले ने इस क्षेत्र में एक बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि भी हासिल कर ली है. जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में धमतरी देश का ऐसा पहला जिला बन गया है, जहां प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) के माध्यम से किसानों को ‘ड्रोन स्प्रेयर’ की अत्याधुनिक सुविधा मिलने जा रही है. इस महत्वाकांक्षी पहल का आधिकारिक शुभारंभ सोमवार को लोहरसी में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में कलेक्टर ने किया.

10 समितियों के ड्रोन पायलटों ने दिखाया दम

लोहरसी में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मौजूद किसानों के सामने जिले की 10 चयनित समितियों के प्रशिक्षित ड्रोन पायलटों ने ड्रोन स्प्रेयर का लाइव डेमोंस्ट्रेशन किया. इस दौरान दिखाया गया कि कैसे ड्रोन तकनीक के जरिए खेतों में उर्वरक और कीटनाशकों का बेहद सटीक छिड़काव किया जा सकता है. इस तकनीक से न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि रसायनों की बर्बादी रुकेगी और खेती की लागत में भी भारी कमी आएगी.

हमारा मुख्य उद्देश्य जिले के हर छोटे-बड़े किसान को वैज्ञानिक खेती से जोड़कर उनकी उत्पादकता और आय को बढ़ाना है. धमतरी को कृषि नवाचारों का देश में मॉडल जिला बनाने की दिशा में यह एक मील का पत्थर साबित होगा: अबिनाश मिश्रा, कलेक्टर

मल्टीपर्पज हब बनेंगी सहकारी समितियां

इस पहल की सबसे खास बात यह है कि इसे CSC e-Governance के सहयोग से जोड़ा गया है. अब ये PACS समितियों को केवल खाद-बीज तक सीमित न रहकर कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के रूप में काम करेंगी. इसका मतलब है कि किसानों को अब एक ही छत के नीचे ड्रोन स्प्रेयर जैसी आधुनिक कृषि सेवाओं के साथ-साथ सभी जरूरी डिजिटल और शासकीय सेवाओं का लाभ भी मिल सकेगा.

इन 10 समितियों के किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

शुरुआती चरण में जिले की जिन 10 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों को इस ड्रोन सुविधा से लैस किया गया है, उनके नाम इस प्रकार हैं: बोड़रा, लोहरसी, दोनर, अछोटा, खरेंगा, भोथीडीह, कुंदेल, गड़ाडीह, जुगदेही और करेली. इन समितियों के अंतर्गत आने वाले गांवों के किसान अब अपनी जरूरत के अनुसार बेहद किफायती दरों पर ड्रोन सेवाओं की बुकिंग करा सकेंगे.

कैसे बनेगा ड्रोन तकनीक वरदान
  • कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तकनीक के आने से ग्रामीण परिदृश्य में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे.
  • पारंपरिक तरीके की तुलना में ड्रोन से बेहद कम समय में बड़े रकबे में छिड़काव संभव होगा.
  • किसानों को रसायनों के छिड़काव के लिए खेतों के बीच में घुसने की जरूरत नहीं होगी, जिससे फसलें सुरक्षित रहेंगी.
  • कीटनाशकों के सीधे संपर्क में न आने से किसानों की सेहत पर भी विपरीत असर नहीं पड़ेगा.
  • इस पहल से ग्रामीण युवाओं के लिए ड्रोन संचालन, मेंटेनेंस और कौशल विकास के नए रास्ते खुलेंगे.

कृषि के क्षेत्र में बना मॉडल जिला

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा, “सहकारी समितियों के माध्यम से सीधे किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाना हमारा एक क्रांतिकारी प्रयास है. ड्रोन तकनीक से किसानों को कम लागत में अधिक दक्षता के साथ काम करने में मदद मिलेगी.”

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