छत्तीसगढ़

8. आर्टिफिशियल स्वीटनर का करते हैं सेवन तो रहें सावधान! हृदय रोग का बढ़ सकता है खतरा

बदलते जीवनशैली की वजह से हमारे स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ा है. हमारे खानपान की वजह से आजकल बीमारियां फैलने का खतरा भी बढ़ गया है. पिछले कुछ वक्त में हृदय संबंधी कई बीमारियों ने लोगों को तेजी से ग्रसित किया है. इसका कारण भी हमारा खान-पान का तौर तरीका है. हाल में हुए एक शोध के अनुसार वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जो लोग कृत्रिम मीठे पदार्थ का उपयोग करते हैं उनकों हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा अधिक हो सकता है.

कई बार लोग अनजाने में शुगर फ्री समझ कर कृत्रिम मीठे पदार्थों का जमकर इस्तेमाल करते हैं और इससे उनमें हृदय रोग की संभावना बढ़ जाती है. रिसर्च में कृत्रिम मीठे की उपयोगीता पर चिंता जाहिर की गई है. लोग अक्सर अपना वजन कम करने के लिए चीनी की जगह कृत्रिम मीठे का उपयोग करते हैं जो भविष्य में कई तरह की बीमारियों को भी उत्पन्न कर सकता है. मेडिकल न्यूज टुडे की खबर के अनुसार कृत्रिम मिठास और हृदय रोग के बीच संबंध को जानने के लिए फ्रेंच नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड मेडिकल रिसर्च द्वारा किया गया. अध्ययन में 100,000 से अधिक प्रतिभागियों के डेटा शामिल थे.

क्या कृत्रिम मिठास का सेवन करना ठीक है?
चीनी के विकल्प के तौर पर कृत्रिम मिठाक का प्रयोग काफी वर्षों से हो रहा है. इसका इतिहास करीब 100 वर्षों से अधिक का है. पहली बार इसकी खोज 1897 में हुई थी. तब से आज तक शोधकर्ताओं ने सुक्रालोज़, एस्पार्टेम, स्टेविया, और जाइलिटोल जैसे कई तरह के कृत्रिम मिठे पदार्थों की खोज की.

कृत्रिम मिठास को लेकर एक्सपर्ट के बीच हमेशा ही विवाद रहा है. कुछ एक्सपर्ट इस पर चिंता जताते हुए कहते हैं कि इसका सेवन टाइप 2 मधुमेह का विकास करता है और साथ ही वजन को भी बढ़ाता है. हालांकि इस तर्क के पर्याप्त सबूत नहीं हैं.

कृत्रिम मिठास का स्वास्थ्य में क्या असर पड़ता है इसकों लेकर 2009 में एक अध्ययन शुरू हुआ था. इस रिसर्च में करीब 170,000 लोगों ने भाग लिया था. चुने गए सभी प्रतिभागी 18 वर्ष से अधिक उम्र के थे और साथ ही उनके जीवनशैली, आहार, हेल्थ, सोशल एक्टिविटी और शारीरिक गतिविधि समेत सभी तरह के डेटा जमा किए गए थे. इसमें शामिल प्रतिभागियों की औसत आयु 42 वर्ष थी.

शोध के दौरान सभी प्रतिभागियों के 24 घंटे के दौरान खाए गए सभी खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थ की जानकारी ली गई. करीब 37% प्रतिभागियों ने कृत्रिम मिठास का भी सेवन किया था. शोधकर्ताओं ने उसकी मात्रा और ब्रांड को नोट किया. प्रतिभागियों की तरफ से एसेसल्फेम पोटैशियम सुक्रालोज़, साइक्लामेट्स, साकारीन, थौमैटिन, नियोहेस्परिडाइन डाइहाइड्रोचलकोन, स्टीविओल ग्लाइकोसाइड्स नाम के कृत्रिम मिठास का प्रयोग किया था.

अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग कृत्रिम मिठास के उच्च उपभोक्ता थे, उनमें गैर-उपभोक्ताओं की तुलना में हृदय रोग का खतरा बढ़ गया था. बाद में फॉलो अप के दौरान 1500 से अधिक प्रतिभागियों ने हृदय संबंधी परेशानियों की सूचना दी. इसमें 730 कोरोनरी हृदय रोग की घटनाएं और 777 सेरेब्रोवास्कुलर रोग की घटनाएं शामिल थीं.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button