अमित शाह का नीतीश, उद्धव पर ही हमला क्यों?
सवाल है कि भाजपा और खास कर अमित शाह के निशाने पर सिर्फ नीतीश कुमार और उद्धव ठाकरे क्यों हैं, जबकि भाजपा से तालमेल तो कई पार्टियों का खत्म हुआ है?

- एम.डी. आरिफ की रिपोर्ट
रायपुर। बिहार में जनता दल यू से तालमेल खत्म होने के बाद पहली बार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बिहार पहुंचे तो उनके दौरे के लिए सीमांचल का वह इलाका चुना गया, जो मुस्लिम बहुल है और सांप्रदायिक लिहाज से बेहद संवेदनशील है। वहां पूर्णिया की रैली में अमित शाह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जोरदार हमला किया। उनको धोखेबाज बताया। उन्होंने जॉर्ज फर्नांडीज से लेकर जीतन राम मांझी तक कई नेताओं के नाम गिनाए और कहा कि नीतीश ने इन सबको धोखा दिया। इससे पहले अमित शाह जब मुंबई गए थे तब उन्होंने उद्धव ठाकरे पर हमला किया था। उनको भी धोखेबाज बताया था और कहा कि उन्होंने सत्ता के लालच में अपनी सरकार गंवाई है।
सवाल है कि भाजपा और खास कर अमित शाह के निशाने पर सिर्फ नीतीश कुमार और उद्धव ठाकरे क्यों हैं, जबकि भाजपा से तालमेल तो कई पार्टियों का खत्म हुआ है? कई पार्टियां पहले भाजपा के साथ आती जाती रही हैं, जैसे जदयू और शिव सेना का मामला है। जदयू पहली बार 2013 में अलग हुई थी फिर 2017 में साथ आई और फिर 2022 में अलग हो गई। इसी तरह शिव सेना 2014 में पहली बार अलग हुई थी और फिर थोड़े दिन के साथ आ गई और फिर 2019 में अलग हो गई।
इसी तरह झारखंड में जेएमएम कई बार भाजपा के साथ आई और साथ छोड़ा, कर्नाटक में जेडीएस, हरियाणा में इनेलो, तमिलनाडु में डीएमके-अन्ना डीएमके आदि पार्टियां भी भाजपा के साथ आती जाती रही हैं। लेकिन उनके नेताओं पर ऐसा हमला नहीं होता है। इससे इन दोनों पार्टियों और नेताओं का महत्व समझ में आता है। ऐसा लग रहा है कि भाजपा को इन दोनों पार्टियों का अलग होना ज्यादा तकलीफ देने वाला है और ज्यादा नुकसान की संभावना भी दिख रही है। तभी नीतीश और उद्धव पर ज्यादा हमले हैं।



