मुख्यालय से लेकर जोन कार्यालयों तक मची हलचल, जनता पूछ रही — आखिर कौन छुपा रहा है राज?
रायपुर नगर निगम में फाइल गायब होने का बड़ा मामला!

रायपुर नगर निगम में इन दिनों फाइलों के गायब होने का मामला लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है। नगर निगम मुख्यालय से लेकर विभिन्न जोन कार्यालयों तक फाइल चोरी और रिकॉर्ड गायब होने की खबरों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
रायपुर की जनता अब यह जानना चाहती है कि आखिर नगर निगम की महत्वपूर्ण फाइलें कौन गायब कर रहा है? क्या यह सिर्फ लापरवाही है, या फिर करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार को छुपाने की कोई बड़ी साजिश?


मामला तब और अधिक संदिग्ध हो गया जब उपायुक्त पर्यावरण एवं उद्यानिकी विभाग, नगर पालिका निगम रायपुर की ओर से जसदेव सिंह बाबरा द्वारा जारी एक पत्र सामने आया। इस पत्र में निगम के समस्त विभागाध्यक्षों और जोन कार्यालयों को निर्देशित किया गया कि यदि उनके पास मुख्य कार्यालय के सामने स्थित गार्डन से संबंधित कोई भी फाइल उपलब्ध हो तो उसे तीन दिवस के भीतर जमा कराया जाए।
बताया जा रहा है कि यह पत्र 5 मई 2026 को जारी किया गया था, लेकिन आज 15 मई हो चुकी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वे फाइलें अब तक मिलीं या नहीं? यदि नहीं मिलीं तो आखिर वे गई कहां?
सूत्रों के अनुसार नगर निगम के एक अन्य जोन कार्यालय से भी लगभग 30 से 40 फाइलें गायब होने की सूचना सामने आ रही है। यदि यह सच है तो यह मामला केवल प्रशासनिक गड़बड़ी नहीं बल्कि सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा पर बड़ा प्रश्नचिन्ह बन चुका है।
जनता के बीच अब कई तरह की चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि —
क्या निगम के भीतर भ्रष्टाचार से जुड़े दस्तावेज गायब किए जा रहे हैं?
क्या किसी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत से रिकॉर्ड हटाए जा रहे हैं?
क्या फाइलों में ऐसे वित्तीय या निर्माण संबंधी राज छिपे हैं जिन्हें सार्वजनिक होने से रोका जा रहा है?
नगर निगम प्रशासन की ओर से अब तक इस पूरे मामले पर कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। न ही किसी उच्चस्तरीय जांच समिति के गठन की आधिकारिक जानकारी दी गई है।
यदि समय रहते इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह प्रकरण आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद बन सकता है। रायपुर की जनता अब जवाब चाहती है — आखिर नगर निगम की फाइलें गायब कैसे हो रही हैं और इसके पीछे कौन लोग हैं?



