छत्तीसगढ़

6. सुप्रीम कोर्ट की शर्तों के बाद बदला ठिकाना, मलकानगिरी में रहेंगे कवासी लखमा

छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े दो हजार करोड़ रुपये के शराब घोटाले के आरोपी और दक्षिण बस्तर के कोंटा विधानसभा क्षेत्र से सात बार के कांग्रेस विधायक कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई है। जमानत के बाद अब उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा से बाहर रहना होगा। ऐसे में उनका नया ठिकाना पड़ोसी राज्य ओडिशा का मलकानगिरी जिला होगा।

छत्तीसगढ़ में रहने पर रोक

सर्वोच्च न्यायालय ने जमानत देते समय स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कवासी लखमा जमानत अवधि के दौरान छत्तीसगढ़ में निवास नहीं कर सकेंगे। जिस राज्य और जिले में वे रहेंगे, वहां के स्थानीय थाना में उन्हें प्रतिदिन उपस्थिति दर्ज करानी होगी। इसके अलावा पासपोर्ट जमा करना सहित अन्य सख्त शर्तें भी लागू की गई हैं।

मलकानगिरी में तय माना जा रहा है प्रवास

सूत्रों के अनुसार, जमानत मिलने के बाद कवासी लखमा का ओडिशा के मलकानगिरी जिला मुख्यालय में रहना लगभग तय है। इसे लेकर स्थानीय स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। विधायक होने के कारण उनकी सुरक्षा और प्रशासनिक समन्वय को लेकर भी आवश्यक प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

सीमावर्ती क्षेत्र होने से परिवार से संपर्क आसान

कवासी लखमा का निजी निवास छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में स्थित है, जो ओडिशा सीमा से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर है। ऐसे में जमानत अवधि के दौरान परिवारजनों के लिए उनसे मुलाकात करना अपेक्षाकृत सरल रहेगा।

जेल से बाहर, ओडिशा रवाना होने की तैयारी

बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कवासी लखमा रायपुर केंद्रीय जेल से रिहा हो चुके हैं। उन्होंने अपने अधिवक्ताओं से चर्चा के बाद ओडिशा जाने की तैयारी शुरू कर दी है।

राजनीतिक गतिविधियों पर बनी नजर

मलकानगिरी क्षेत्र में भी कवासी लखमा के समर्थकों की संख्या अच्छी बताई जा रही है। ऐसे में उनके वहां प्रवास के दौरान होने वाली राजनीतिक गतिविधियों पर भी सभी की नजर बनी हुई है। यह जमानत केवल कानूनी राहत नहीं, बल्कि दक्षिण बस्तर की राजनीति में आने वाले समय में नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे सकती है।

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