छत्तीसगढ़

4. चारपाई पर लेटा कर गर्भवती महिला को पहुंचाया 108 एंबुलेंस तक, दर्द से तड़पती रही महिला

जगदलपुर।  बास्तानार मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर लोहंडीगुड़ा ब्लॉक के ग्राम पंचायत बुरगुम की आज भी ऐसी स्थिति है कि एक गर्भवती महिला को खाट यानी चारपाई का सहारा लेना पड़ा है। सड़की नहीं हैं, जिससे एंबुलेंस घरों तक नहीं पहुंच सकती है। आलम यह है कि इन्हें एंबुलेंस तक पहुंचने के लिए किसी तरह अपनी व्यवस्था खुद देखनी पड़ती है। दरअसल, पटेलपारा बुरगुम गांव की सड़क खराब होने से 102 गाड़ी आने से मना करने के बाद एक गर्भवती महिला को ग्रामीणों ने उसे खाट से 2 किलोमीटर दूर ले जाकर 108 एंबुलेंस तक पहुंचाया। जिसके बाद उसे किलेपाल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। जहां गर्भवती महिला का प्रसव हुआ। फिलहाल अब मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। इस महिला महिला का नाम परमिला पति हेमलाल बताया जा रहा है।

बता दें बीते कुछ दिन पहले भी एक ऐसा ही मामला सामने आया था जहां एक वृद्ध बुजुर्ग को कावंड से 108 एंबुलेस तक पहुंचाया था। जो 15 दिनों तक बीमार था। और अकेला रह रहा था। आज भी बस्तर के अंदरूनी क्षेत्रों में सड़क बिहीन जगह में ये समस्या आ रहीं है। बस्तर जिले का एक मात्र ब्लाक जो पिछड़ा ब्लाक के नाम से जाना जाता है । बास्तानार ब्लाक का ये वीडियो इसी ब्लाक के ग्राम पंचायत बुरगुम का है, जो चित्रकोट विधानसभा में आता है। वर्तमान में यहां के क्षेत्रीय विधायक राजमन वेंजाम जी है। विधायक बंगले से मात्र 10- 12 किलोमीटर दूरी पर है। जब अपने स्थानीय ब्लाक की स्थिति ये है तो आप सोच सकते है सुदूर इलाकों की स्थिति क्या होगी।

आजादी के 75वर्ष बाद भी सुदूर ग्रामीण अंचल में निवास करने वाले आदिवासी ग्रामीणों को आज भी मुलभुत सुविधा नहीं मिला है कहने को तो राजनीतिक पार्टिया बड़ी-बड़ी बातें कहती है कि हमने विकास की गंगा बहाई है लेकिन वास्तविकता धरातल पर कुछ और ही बयां करती है। इस वीडियो में एक गर्भवती महिला को चारपाई में उठाकर एम्बुलेंस तक लाया जा रहा है। विकास के नाम पर करोड़ों रूपये आदिवासियों की विकास के लिए जारी होते हैं, लेकिन उन तक पहुंच नहीं पाता है। आखिर उसे कौन खा जाता है। ग्रामीणों को पता नहीं चल पाता है। सब कुछ आदिवासी के नाम पर होने के बावजूद भी आदिवासियों को मूलभुत सुविधाओं से वंचित किया जाता है ऐसा क्यों?

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