10. भिलाई में ट्रिपल मर्डर केस के आरोपी को फांसी की सजा

छत्तीसगढ़ के भिलाई में 6 साल पहले हुए तिहरे हत्याकांड में आरोपी को मृत्युदंड की सजा दी गई है. दुर्ग की विशेष अदालत ने अपनी पत्नी, डेढ़ माह की मासूम बेटी और एक अन्य व्यक्ति की निर्मम हत्या करने वाले दोषी रवि शर्मा को फांसी की सजा सुनाई है. अपर सत्र न्यायाधीश यशवंत कुमार सारथी की अदालत ने इस कृत्य को ‘क्रूरतम’ श्रेणी का मानते हुए अपराधी को मौत की नींद सुलाने का आदेश जारी किया.
अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता भावेश कटरे ने प्रभावी पैरवी करते हुए आरोपी के खिलाफ ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए.
यह खौफनाक साजिश जनवरी 2020 में भिलाई की तालपुरी पारिजात कॉलोनी में रची गई थी. जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी रवि शर्मा पहले से शादीशुदा था और राउरकेला में उसका परिवार था, जिसे छिपाकर उसने भिलाई में मंजू नामक महिला से दूसरी शादी की थी. बच्ची के जन्म के बाद उपजे विवाद के कारण उसने पूरे परिवार को खत्म करने और खुद को मृत घोषित कर कानून की आंखों में धूल झोंकने का षड्यंत्र रचा.
उसने अपनी पहचान मिटाने के लिए एक मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति को झांसे में लेकर घर बुलाया और उसकी हत्या कर दी, ताकि उसकी लाश को अपनी लाश बता सके. इसके बाद उसने अपनी पत्नी मंजू और दुधमुंही बच्ची को भी मौत के घाट उतार दिया और साक्ष्य मिटाने के लिए घर में आग लगा दी.
पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और लिखावट विशेषज्ञों की मदद से इस उलझी हुई गुत्थी को सुलझाया. आरोपी ने दीवार पर झूठी कहानियां लिखकर जांच टीम को गुमराह करने की कोशिश की थी, लेकिन मोबाइल लोकेशन और रेलवे स्टेशन की घेराबंदी ने उसे बेनकाब कर दिया.
तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेश ध्रुव के नेतृत्व में तैयार की गई मजबूत चार्जशीट और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी ने रवि शर्मा को फांसी के फंदे तक पहुँचाया है. अदालत के इस फैसले ने समाज में कड़ा संदेश दिया है कि जघन्य अपराध करने वाला कानून के शिकंजे से कभी बच नहीं सकता.



