छत्तीसगढ़

3. वनस्पति घी में अगर पकाया खाना तो घेर लेती हैं 100 बीमारियां, शरीर बनने लगता है अंदर से खोखला

आज कल के समय में हम बिना सोचे- समझे किसी भी चीज का सेवन करना शुरू कर देते हैं। इन्ही में से एक है हाइर्डोजनीकृत वनस्पति ऑयल। इसके अंदर पाया जाने वाला ट्रांस फैटी एसिड ना केवल आपके दिल के लिए खतरनाक है, बल्कि इसके कई दूसरे भी प्रभाव हैं।

ऐसा नहीं है कि ट्रांस फैट एसिड की हमें आवश्यकता ही नहीं है। लेकिन वनस्पति तेल में इसकी मात्रा 60 प्रतिशत से भी अधिक है जो कि मीट से भी कही ज्यादा है। वहीं, डेयरी उत्पादों में ट्रांस फैटी एसिड की मात्रा महज 2 से 5 प्रतिशत तक ही होती है। ऐसे में इसकी अधिक मात्रा ना केवल आपके दिल के लिए खतरनाक है, बल्कि यह आपको मधुमेह के जोखिम को भी बढ़ा सकती है। आज हम आपको वनस्पति तेल के जरिए होने वाले नुकसान के बारे में बताएंगे।

दिल को पहुंचाता है नुकसान

अगर आप ऐसी खाद्य सामग्रियों का सेवन करते हैं जिनमे ट्रांस फैटी एसिड की मात्रा अधिक होती है, तो यह सीधे आपके हार्ट पर असर करता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि यह आपके शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को बढ़ा देता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम कर देता है।विशेषज्ञों की मानें तो खाद्य सामग्री में ट्रांस फैट अगर 4 प्रतिशत हो तो वह भी बहुत होता है। वहीं, हाल ही में हुए अध्ययन बताते हैं कि भारत में इस्तेमाल किए जाने वाले वनस्पति ऑयल में ट्रांस फैटी एसिड 40 से 50 प्रतिशत तक होता है।

ब्रेस्ट कैंसर का बढ़ता है खतरा

सैचुरेटिड फैटी एसिड (SFA) हमारे शरीर के लिए हानिकारक माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह कुल एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है। वहीं, अगर बात करें ऐसी खाद्य सामग्री की जिनमें कम SFA हो यह अधिक हानिकारक नहीं होते, जैसे कि नारियल तेल। आपको बता दें नारियल तेल का असर सीरम लिपिड पर नहीं होता। जबकि वनस्पति के अंदर पाया जाने वाला अधिक ट्रांस फैटी एसिड सीरम लिपिड को नुकसान पहुँचा सकता है। यह सीधा हार्ट पर अटैक करता है और महिलाओं में होने वाले ब्रेस्ट कैंसर का भी एक मुख्य कारण है.

गर्भ में पल रहे बच्चे की आंखों को पहुंचा सकता है नुकसान

वनस्पति तेल के जरिए भ्रूण में पल रहे शिशु की आंखों को भी नुकसान पहुंचा सकता है। आपको बता दें कि शरीर के अंदर पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी ऐसिड होता है जो गर्भ में पल रहे शिशु की आंखों की रोशनी का विकास करता है। लेकिन ट्रांस फैटी एसिड का अधिक सेवन करने से यह पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड को रोकने का कार्य करता है। जिसकी वजह से शिशु को आंखों से जुड़ी समस्या हो सकती है।मोटापा और वजन बढ़ाए

अगर आप अधिक मात्रा में ट्रांस फैटी एसिड युक्त खाद्य पदार्थों को सेवन करते हैं तो इससे आपका वजन और मोटापा दोनों बढ़ने लगते हैं। ऐसे में ट्रांस फैटी एसिड अगर औद्योगिक रूप से उत्पादित होते हैं, और इन्हें बनाने के लिए पशु या पौधों का इस्तेमाल किया जाता है तो इसमें उच्च मात्रा में कैलोरीज होती हैं, जिसकी वजह से वजन और मोटापा अधिक बढ़ने लगता है।

डायबिटीज़ होने का खतरा

ट्रांस फैटी एसिड अगर अधिक मात्रा में शरीर के अंदर प्रवेश करता है, तो यह कोशिका झिल्ली के कार्यों में बाधा उत्पन्न करता है और इंसुलिन को प्रभावित करता है। इसके कारण मधुमेह होता है। वहीं, ट्रांस फैट की कम मात्रा लेने पर भी इंसुलिन बुरी तरह प्रभावित होती है और इससे भी मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए सीमित मात्रा में ट्रांस फैट का सेवन भी जरूरी है।

मस्तिष्क में करता है गड़बड़

ट्रांस फैट आपके मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव डाल सकता है। इसके अधिक मात्रा में शरीर के अंदर प्रवेश करने से यह मस्तिष्क की झिल्ली में जमा हो जाता है। इसके बाद यह मस्तिष्क के कार्य में बाधा उत्पन्न करता है। इसकी वजह से अल्जाइमर, मनोभ्रंश और अवसाद का खतरा बढ़ने लगता है। ऐसे में अगर आप वनस्पति या ट्रांस फैट की खपत कम करते हैं तो इन समस्याओं से बचा जा सकता है।

इस तरह की एलर्जी होने की संभावना

ट्रांस वसा की अधिक खपत के कारण एलर्जी की समस्या भी पैदा हो सकती है। इसमें अस्थमा, एक्जिमा, कोल्ड और अन्य समस्याएं शामिल हैं। हाल ही में हुए एक अध्ययन से पता चलता है कि ट्रांस वसा की एलर्जी का असर 13 से 14 साल के बच्चों में अधिक होता है। इसके अलावा यह अध्ययन यह भी बताता है कि इस तरह का जुड़ाव मोनोसैचुरेटेड और पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड के समान नहीं है।

कोलन कैंसर को देता है न्यौता

ट्रांस वसा कोलन कैंसर का कारण भी बन सकता है। हाल ही में हुई एक रिसर्च बताती है कि जो लोग 67 साल की उम्र से अधिक हैं, इसके अलावा किसी तरह की नॉन- स्टेरायडल दवाओं का सेवन नहीं कर रहे हैं, और अधिक ट्रांस फैट की खपत ले रहे हैं, उन लोगों में कोलन कैंसर होने का खतरा 50 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा ट्रांस वसा का असर आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी पड़ता है।सूजन की समस्या

ऐसे बहुत से अध्ययन में यह बात सामने आई है कि शरीर में इंफ्लेमेटरी साइटोकिन्स ट्रांस फैट की अधिक खपत की वजह से ही शरीर में बढ़ते हैं। इसके साथ ही ऐसे लोग जिनके पेट के आस पास चर्बी है उन्हें ट्रांस फैट की वजह से डायबिटीज़, एडिमा, ऑटोइम्यून और सूजन से संबंधित समस्या भी पैदा हो जाती है।

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