छत्तीसगढ़

6. रायपुर जेल में बंद दो उज्बेकिस्तानी महिलाओं के निर्वासन को मंजूरी

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद रायपुर की सेंट्रल जेल में बंद उज्बेकिस्तान की दो महिला नागरिकों के स्वदेश निर्वासन का रास्ता साफ हो गया है. ये दोनों महिलाएं वैध दस्तावेजों की कमी और वीजा की अवधि समाप्त होने के कारण जनवरी 2026 से हिरासत में थीं.

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए दोनों विदेशी नागरिकों के निर्वासन (डीपोर्टेशन) को मंजूरी दे दी है. अदालत ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि राज्य सरकार और भारत सरकार भी इनके निर्वासन का प्रस्ताव दे चुकी हैं.

सुनवाई के दौरान भारत में उज्बेकिस्तान गणराज्य के दूतावास ने भी अदालत से याचिकाकर्ताओं के त्वरित निर्वासन का आदेश पारित करने का अनुरोध किया. दूतावास ने आश्वासन दिया है कि वह इसके लिए आवश्यक दस्तावेज और व्यवस्थाएं तैयार करने के लिए पूरी तरह तैयार है और इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने में हर संभव सहायता प्रदान करेगा.

वकील के अनुसार, उज्बेकिस्तान की दो महिलाओं, फेरुजा सबीरोवा और दिनोरा सफ्यतिदिनोवा को 9 जनवरी 2026 को रायपुर के एक निजी होटल से स्थानीय पुलिस ने भारत में अवैध रूप से रुकने के आरोप में हिरासत में लिया था.

इनमें से फेरुजा का पासपोर्ट और वीजा खो गया था, जबकि दिनोरा का पासपोर्ट तो वैध था, लेकिन उनका वीजा 16 मई 2025 को ही समाप्त हो चुका था. याचिकाकर्ताओं के वकील ने आरोप लगाया था कि दोनों को 14 जनवरी 2026 से ही रायपुर सेंट्रल जेल के डिटेंशन सेंटर में रखा गया है.

दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि दोनों विदेशी महिलाएं अवैध रूप से भारत में रह रही थीं, जिसके चलते उनके खिलाफ संज्ञेय अपराध के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी. इसके बाद उन्हें 26 अप्रैल 2026 को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर रायपुर सेंट्रल जेल भेजा गया था.

अभियोजन ने स्पष्ट किया कि इस पूरी कार्रवाई की जानकारी महिलाओं के परिजनों के साथ-साथ नई दिल्ली स्थित उज्बेकिस्तान दूतावास और विदेश मंत्रालय को भी दे दी गई थी. कोर्ट में सरकार का पक्ष रखते हुए कहा गया कि वैध पासपोर्ट और वीजा के बिना भारत में रहने के कारण उनकी हिरासत पूरी तरह कानूनी है और जल्द ही दोनों को उनके देश वापस भेज दिया जाएगा.

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