चार दशकों की निस्वार्थ सेवा को मिला राष्ट्रीय सम्मान: डॉ. रामचंद्र गोडबोले एवं डॉ. सुनीता गोडबोले पद्मश्री से सम्मानित

रायपुर/दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर स्थित दंतेवाड़ा जिले के ऐतिहासिक ग्राम बारसूर के प्रसिद्ध चिकित्सक दंपति डॉ. रामचंद्र गोडबोले एवं डॉ. सुनीता गोडबोले को चिकित्सा एवं सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उनके अद्वितीय और प्रेरणादायी योगदान के लिए वर्ष 2026 का पद्मश्री सम्मान प्रदान किया गया है। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायपुर स्थित अपने निवास में दोनों चिकित्सकों का सम्मान कर उन्हें बधाई दी।
डॉ. गोडबोले दंपति पिछले लगभग चार दशकों से बस्तर के सुदूर वनांचलों, नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा एवं अबूझमाड़ क्षेत्र में निरंतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। उस दौर में जब इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं लगभग न के बराबर थीं और नक्सलवाद अपने चरम पर था, तब उन्होंने शहरों की सुविधाओं को छोड़कर आदिवासी अंचल को अपनी कर्मभूमि बनाया।

कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हजारों वनवासी परिवारों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई। उनके अथक प्रयासों से अनेक गांवों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ी और लोगों को समय पर उपचार मिलने लगा। स्थानीय समुदाय के बीच वे केवल चिकित्सक ही नहीं, बल्कि एक संरक्षक और मार्गदर्शक के रूप में भी सम्मानित हैं।
‘सेवा ही धर्म’ के सिद्धांत को जीवन का लक्ष्य बनाकर कार्य करने वाले इस दंपति ने मानवता की सेवा का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। पद्मश्री सम्मान उनके समर्पण, त्याग और समाज के प्रति प्रतिबद्धता का राष्ट्रीय स्तर पर किया गया सम्मान है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि डॉ. रामचंद्र गोडबोले और डॉ. सुनीता गोडबोले ने बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा की ऐसी मिसाल कायम की है, जिस पर पूरा छत्तीसगढ़ गर्व करता है। उनका जीवन सेवा, संवेदनशीलता और समर्पण का अनुपम उदाहरण है।
डॉ. गोडबोले दंपति को मिला यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत योगदान की पहचान है, बल्कि बस्तर की उस सेवा परंपरा का भी सम्मान है, जिसने कठिन परिस्थितियों में भी मानवता की लौ को निरंतर प्रज्ज्वलित रखा है।




