छत्तीसगढ़

“अमोरा पार्क मामला: नोटिस दिया, जिम्मेदारी खत्म? या फिर अंदरखाने खेल?”

अमोरा पार्क पर मेहरबानी क्यों? नोटिस के बाद भी जोन 10 की चुप्पी!”

रायपुर। राजधानी रायपुर में “अमोरा पार्क” से जुड़ा मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। नगर निगम जोन क्रमांक 10 की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जहां नोटिस जारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
जानकारी के अनुसार, जोन 10 द्वारा अमोरा पार्क के संचालक को 7 दिन का नोटिस जारी कर भूमि स्वामित्व के दस्तावेज, भवन निर्माण की अनुमति, स्वीकृत नक्शा सहित सभी आवश्यक कागजात प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन समयसीमा समाप्त होने के बाद भी संचालक द्वारा कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया।इसके बावजूद निगम की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

आरोप है कि जोन 10 के अधिकारी और कर्मचारी नोटिस देने के बाद अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त हो गए हैं और मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यही अधिकारी तब पूरी ताकत दिखाते हैं, जब कार्रवाई गरीब और छोटे व्यापारियों पर करनी होती है। ठेला-रेहड़ी वालों पर बुलडोजर चलाना, दुकानों को जब्त करना और तत्काल कार्रवाई करना आम बात है। लेकिन जब मामला किसी रसूखदार और संपन्न व्यक्ति का होता है, तो नियमों की अनदेखी कर दी जाती है।

भ्रष्टाचार और लेन-देन की आशंका
अमोरा पार्क संचालक द्वारा दस्तावेज प्रस्तुत न करने के बावजूद कार्रवाई का अभाव सीधे तौर पर लेन-देन और भ्रष्टाचार की आशंका को जन्म देता है। यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या प्रभावशाली लोगों को संरक्षण दिया जा रहा है?
जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी सवालों में
मामले की जानकारी होने के बावजूद क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों द्वारा चुप्पी साधे रखना भी उनके कर्तव्य पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
आंदोलन की चेतावनी
सूत्रों के मुताबिक, सामाजिक संगठन इस मुद्दे को लेकर अब आंदोलन की तैयारी में हैं। जल्द ही जोन 10 कार्यालय का घेराव और आक्रोश रैली निकाली जा सकती है। यदि ऐसा होता है, तो स्थिति और ज्यादा गंभीर हो सकती है।
अब निगाहें प्रशासन पर
लगातार मीडिया में मामला आने के बावजूद कार्रवाई न होना नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन कब जागता है और क्या दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई होती है या नहीं।
जनता का सीधा सवाल—क्या कानून सबके लिए बराबर है?
अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता

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