अंतर्राष्ट्रीय

5. 42 हजार टन LPG लेकर ‘जग वसंत’ वेसल कांडला पोर्ट पहुंचा, होर्मुज के बीच भारत को बड़ी राहत…

वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। 42 हजार मीट्रिक टन से अधिक LPG लेकर ‘जग वसंत’ नाम का टैंकर गुजरात के कांडला पोर्ट पर पहुंच गया है। यह जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत पहुंचा, जो मौजूदा अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच बेहद अहम माना जा रहा है। ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के बीच आई यह बड़ी खेप देश में LPG की उपलब्धता को स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

कांडला पोर्ट पर होगा मिड-सी ट्रांसफर

कांडला पोर्ट अथॉरिटी के मुताबिक, इस LPG को मिड-सी ट्रांसफर के जरिए उतारा जाएगा। इस प्रक्रिया में जहाज से गैस को समुद्र में ही दूसरे सिस्टम या पोर्ट सुविधाओं तक ट्रांसफर किया जाता है। इससे गैस उतारने में तेजी आती है। समय की बचत होती है, सप्लाई जल्दी शुरू हो जाती है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती

कांडला पोर्ट देश के प्रमुख ऊर्जा आयात केंद्रों में से एक है। यहां से LPG गैस को देश के विभिन्न राज्यों में भेजा जाता है। ‘जग वसंत’ की इस खेप से घरेलू LPG सप्लाई मजबूत होगी। बाजार में स्थिरता आएगी, संभावित कमी की आशंका कम होगी।

होर्मुज संकट के बीच भारत को राहत

ईरान-अमेरिका तनाव के चलते होर्मुज मार्ग पर जोखिम बना हुआ है। इसके बावजूद ईरान ने भारत समेत कुछ देशों को विशेष अनुमति दी है, जिससे भारतीय जहाज सुरक्षित गुजर पा रहे हैं।

अब तक भारत पहुंचे प्रमुख टैंकर

तनावपूर्ण हालात के बीच अब तक MT शिवालिक (LPG) – 16 मार्च, मुंद्रा पोर्ट, MT नंदा देवी (LPG) – 17 मार्च, कांडला पोर्ट, जग लाडकी (81,000 टन क्रूड ऑयल) – 18 मार्च, मुंद्रा, Shenlong (सऊदी क्रूड) – 11 मार्च के आसपास, मुंबई में अहम टैंकर भारत पहुंच चुके हैं। इन टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही भारत की ऊर्जा सप्लाई चेन के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

युद्ध के ताजा हालात

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष को 28 दिन हो चुके हैं। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया है कि अगले 10 दिनों तक ईरान के ऊर्जा ढांचे पर कोई हमला नहीं किया जाएगा। इस बयान से वैश्विक ऊर्जा बाजार में थोड़ी राहत की उम्मीद जगी है। ‘जग वसंत’ टैंकर का कांडला पहुंचना भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। इससे न केवल LPG सप्लाई मजबूत होगी, बल्कि वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी सुनिश्चित होती नजर आ रही है।

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