7. तीन तेल, 3 अलग-अलग फायदे! जानें रात में सोने से पहले नाभि में इन्हें क्यों लगाएं

दादी-नानी के जमाने से नाभि में तेल लगाने की परंपरा रही है। पहले को पेट दर्द में भी दादी-नानी सरसों के तेल में अदरक पकाकर इस तेल को लगा देती थीं। तो, कहीं चोट लग जाए तो हल्दी-लहसुन को सरसों के तेल में लगाकर नाभि में लगा दिया करती थीं। दरअसल, ये तरीका काफी कारगर माना माना जाता था। इसके पीछे आयुर्वेद की अवधारणा थी कि नाभि से शरीर के तमाम अंग जुड़े रहते हैं और जब आप यहां तेल लगाते हैं तो इससे उन शरीर के हिस्सों की हीलिंग होती है। इससे शरीर को कई प्रकार के फायदे मिलते हैं। तो, आज हम जानेंगे नाभि में तीन अलग-अलग तेल लगाने के बारे में और फिर जानेंगे इनके फायदे।
नाभि में बादाम का तेल लगाने के फायदे-
नाभि पर बादाम का तेल लगाने से कई लाभकारी प्रभाव होते हैं। बादाम में विटामिन ई होता है जो स्किन के लिए फायदेमंद है। ये तेल त्वचा को मुक्त कणों से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है। इसके अतिरिक्त, बादाम के तेल में फैटी एसिड होते हैं जो त्वचा की लोच में सुधार करते हैं और इसे ड्राई होने से बचाते हैं। इसके अलावा ये कोलेजन बूस्टर है जो कि स्किन के लिए फायदेमंद है।
नाभि में नारियल तेल लगाने के फायदे-
नारियल का तेल पाचन में सुधार, सूजन को कम करने और कब्ज से राहत दिलाने में मदद कर सकता है। ये मासिक धर्म की ऐंठन से राहत दिलाता है। नाभि के पास तेल लगाने से भी मासिक धर्म की ऐंठन से राहत मिल सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि नाभि गर्भनाल के माध्यम से गर्भाशय से जुड़ी होती है। इसके अलावा ये फटी एड़ियों और ड्राई स्किन की समस्या को भी कम करने में मददगार है। इसके अलावा ये नारियल तेल पाचन तंत्र को तेज करने में मददगार है जो मेटाबोलिज्म को तेज करता है और पेट साफ करने में मददगार है।
नाभि में सरसों का तेल लगाने के फायदे-
नाभि में सरसों तेल लगाना आपको सर्दी-जुकाम की समस्या को कम करने में मददगार है। इसके अलावा पेट के किनारों के चारों ओर गोलाकार गति में सरसों का तेल रोजाना लगाने से लिवर में प्लीहा से गैस्ट्रिक और पित्त रस निकलने में मदद मिलती है, जिससे पाचन में सुधार होता है। मतली और पेट के दर्द से राहत पाने के लिए भी आप इस तेल को लगा सकते हैं।



