छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ मितानिन (आशा) यूनियन का हुआ एक दिवसीय राज्यव्यापी धरना प्रदर्शन

नया रायपुर धरना स्थल तूता में एक दिवसीय राज्यव्यापी धरना प्रदर्शन के जरिए मितानिनों ने अपनी मांगे सरकार के समक्ष रखी। राज्य सरकार ने पिछले चुनावी घोषणापत्र में वादा किया था कि वे मितानिनों को 5000/- मासिक देंगे। लेकिन उन्होंने अपना वादा पूरा नहीं किया। मितानिनों से स्वास्थ्य विभाग का सारा काम कराया जाता है, दिन-रात काम करना पड़ता है इसलिए यह 5000रु की मांग भी मितानिनों के लिए कम पड़ती है। सरकार ने 2200/- प्रतिमाह देने की घोषणा की थी।

घोषणा के बाद से कई जिलों में प्रोत्साहन राशि जमा नहीं हुई है, जहां हुई है वहां एक दो महीने की हुई है, 2200 रुपया भी अधिकतर जिलों में नहीं आया है, जहां आया है वहां एक या दो महीने का आया है, कितने महीने का आया है और राज्यांश कितना आएगा इसके बारे में कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है। जो कुछ प्रोत्साहन राशि के रूप में मानदेय प्राप्त होता है वह भी समय पर नहीं होता है टुकड़े टुकड़ों में आता है इसके कारण मितानिनों में व्यापक असंतोष व्याप्त है। मांग पत्र में निम्नलिखित मांगे रखी गई है।

★5000/-प्रतिमाह देने का चुनावी वादा पूरा करो।
★प्रोत्साहन राशि नहीं, एकमुश्त वेतन दो।
★मितानिनों को शासकीय कर्मचारी का दर्जा दो।
★प्रोविडेंट फंड (भविष्य निधि) व ईएसआई सुविधा देना होगा।
★अनुकंपा नियुक्ति व पेंशन दो।

यह मांग पत्र माननीय मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री महोदय, सचिव महोदय, स्वास्थ्य सचिव महोदय, एनएचएम डायरेक्टर को सौंपा गया। धरने में कई जिलों से सैकड़ो की संख्या में मितानिनें उपस्थित थी।

धरने को प्रांताध्यक्ष लक्ष्मी निषाद सहित लक्ष्मी नरेटी, नीरा देवी साहू, तनुजा धृतलहरे, अनसूया राठौर, सरोज दरपे, शकुन ध्रुव, सोनिया साहू, बबीता सोना, अंजनी जायसवाल, सुनंदा पाल, प्रिया अनंत आदि ने संबोधित किया।

यूनियन के सलाहकार एवं एआईयूटीयूसी के छग राज्य प्रभारी कॉमरेड विश्वजीत हारोडे ने कहा कि मितानिनें प्राकृतिक दुर्योग एवं तमाम असुविधाओं को दरकिनार कर राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत राज्य की जनता को स्वास्थ्य सेवा मुहैया करती है। जनसमुदाय का स्वास्थ्य सुरक्षित रखने में वे अपनी जान की बाजी लगा देती हैं। कोरोना काल में जान की बाजी लगाकर स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत इन्होंने तमाम तरह के काम किए थे। लेकिन इन्हें जो प्रोत्साहन राशि प्राप्त होती है वह जीने के लायक नहीं है। इन्हें स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत कर्मचारी माना जाए एवं प्रोत्साहन राशि नहीं बल्कि वेतन दिया जाए। उन्होंने आगे बताया की हरियाणा एवं दिल्ली में मितानिनें हड़ताल पर हैं एवं सम्मानजनक वेतन की मांग कर रही हैं। दिल्ली में हड़ताल को एक महीना हो गया है एवं वहां की सरकार ने वहां के मितानिन नेताओं को बर्खास्त कर दिया है। उन्होंने अपनी मांगों को लेकर जोरदार आंदोलन चलाते रहने का आह्वान मितानिनों से किया।

धरने में दिल्ली में मितानिन बहनों पर होने वाली कार्रवाई की निंदा करते हुए प्रस्ताव पारित किया गया। साथ ही दिल्ली एवं हरियाणा के आंदोलन का समर्थन किया गया। छत्तीसगढ़ में आंदोलन को आगे बढ़ने का निर्णय लिया गया एवं यह तय किया गया कि यह मांग पत्र अगले एक सप्ताह में प्रत्येक जिले कलेक्टर के द्वारा मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री के नाम सौंपा जाएगा।

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