छत्तीसगढ़

3. टीबी मरीजों को खोजने 1 लाख 85 हजार घरों में देंगे दस्तक, अधिकारी बोले घबराएं नहीं, जांच कराएं

जगदलपुर।  राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत बस्तर जिले में टीबी को मिटाने के लिए निक्षय बस्तर- सघन टीबी सर्वे अभियान का शुभारम्भ हो गया है। अब टीबी मरीजों को खोजने के लिए 1 लाख 85 हजार घरों में दस्तक देंगे। यह काम टीबी मितान करेंगे और इन्हीं के हाथ मरीजों का काउंसलिंग के साथ सहायता का जिम्मा भी होगा।

जिला टीबी उन्न्मूलन अधिकारी सीआर. मैत्री ने बताया कि जिले में अक्टूबर से जनवरी 2023 तक एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान चलाया जाएगा। अभियान के दौरान सर्वे दल द्वारा 1 लाख 85 हजार घरों का सर्वे होगा। जिलेवासियों से अपील है कि सर्वे के दौरान टीबी के लक्षण वाले व्यक्ति अपने रोग को छिपाएं नहीं, बल्कि लक्षणों के बारे में खुलकर बताएं। टीबी बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2025 तक का लक्ष्य तय किया है। वहीं छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश को वर्ष 2023 तक टीबी से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है।

अधिकारी बोले घबराएं नहीं उपचार कराएं

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.के.चतुर्वेदी ने बताया कि डोर टू डोर होने वाले सर्वे में इस बार निक्षय बस्तर एप्लिकेशन का प्रयोग किया जाएगा। जिले वासियों से अपील है कि टीबी की नि:शुल्क जांच अवश्य कराएं। यह जांच अत्यधिक आधुनिक मशीन से बलगम के माध्यम से होती है। टीबी की पुष्टि होने पर स्वास्थ्य विभाग की द्वारा डाट्स पद्धति से नि:शुल्क उपचार किया जाता है। जिला कार्यक्रम प्रबंधक अखिलेश शर्मा ने बताया कि निक्षय बस्तर अभियान के अंतर्गत जन जागरूकता को विशेष महत्व देते हुए टीबी के संभावित मरीजों की जांच एवं उपचार के लिए स्थानीय गांव के जनप्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन दीदी, राजीव युवा मितान और स्वयं सहायता समूह को कार्यक्रम में शामिल कर उनका सहयोग लिया जाएगा।

यह है टीबी के लक्षण

तीन सप्ताह या अधिक समय खांसी, लंबे समय से बुखार और शाम के दौरान बुखार का बढ़ जाना, सांस फूलना, लगातार वजन घटने, सीने में दर्द, बलगम के साथ खून आना, बार बार लूज मोशन होने की स्थितियों में टीबी का जांच अवश्य करवाना चाहिए। वहीं पहले से  इलाज करवा रहे मरीज नियमित रूप से दवा का पूरा सेवन करना जरूरी है।

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