जोन क्रमांक 10 में अवैध निर्माण पर सियासत तेज, क्या सचिन मेघानी अकेले जिम्मेदार?

रायपुर नगर निगम के जोन क्रमांक 10 में इन दिनों भारतीय जनता पार्टी के भीतर ही अंदरूनी विवाद खुलकर सामने आ गया है। जोन अध्यक्ष बने भाजपा पार्षद सचिन मेघानी को हटाने की मांग अब उसी जोन के अन्य भाजपा पार्षदों द्वारा संगठन तक पहुंचा दी गई है। बताया जा रहा है कि जोन के कुल 7 पार्षदों में से 6 पार्षदों ने मिलकर संगठन को पत्र सौंपा है और सचिन मेघानी को पद से हटाने पर जोर दिया है।

हटाने के पीछे जो सबसे बड़ा कारण सामने आ रहा है, वह है वार्डों में हस्तक्षेप और अवैध प्लाटिंग तथा अवैध निर्माण के मुद्दे को लगातार उठाना। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि सचिन मेघानी अपने करीबी लोगों के माध्यम से वसूली का काम करवा रहे हैं। हालांकि यह आरोप कितने सही हैं, इसकी निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है। यदि किसी जनप्रतिनिधि पर भ्रष्टाचार या वसूली जैसे गंभीर आरोप लगते हैं तो कार्रवाई भी उतनी ही कठोर होनी चाहिए।
लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि क्या केवल सचिन मेघानी ही दोषी हैं?

क्या जोन क्रमांक 10 के अंतर्गत आने वाले सभी वार्डों में हो रहे अवैध निर्माण और अवैध प्लाटिंग से बाकी पार्षद पूरी तरह अनजान हैं?
जोन क्रमांक 10 लंबे समय से अवैध निर्माण और अवैध प्लाटिंग को लेकर चर्चा में रहा है। लगातार समाचार प्रकाशित होने के बावजूद न तो जोन स्तर पर ठोस कार्रवाई दिखाई दे रही है और न ही रायपुर नगर निगम मुख्यालय की ओर से किसी प्रकार की सख्ती नजर आ रही है।



वार्ड क्रमांक 49 में स्थित अमोरा पार्क इसका सबसे बड़ा उदाहरण बन चुका है। जानकारी के अनुसार रायपुर नगर निगम द्वारा लगातार तीन नोटिस जारी किए जाने के बाद भी अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। यदि कोई प्रोजेक्ट निगम की नजर में अवैध है, तो फिर उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? यह प्रश्न सीधे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।
इसी प्रकार वार्ड क्रमांक 52 के अंतर्गत प्रोग्रेसिव पॉइंट में संचालित टीएचडी होटल को भी कई बार नोटिस जारी किए जाने की बात सामने आई है। बावजूद इसके होटल का संचालन जारी है। यदि निर्माण और संचालन पूर्णतः अवैध है तो फिर कार्रवाई में देरी क्यों?
वार्ड क्रमांक 54 में भी लंबे समय से अवैध प्लाटिंग की शिकायतें सामने आती रही हैं। जमीनों की बिक्री के बाद अब कई स्थानों पर बिना वैध अनुमति के निर्माण कार्य तेजी से चल रहे हैं। वहीं वार्ड क्रमांक 50 में भी ऐसे कई भवन निर्माण सामने आए हैं जिनके पास नगर निगम की स्वीकृति तक नहीं है।
इन सभी तथ्यों को देखा जाए तो यह स्पष्ट होता है कि जोन क्रमांक 10 के लगभग हर वार्ड में अवैध निर्माण और प्लाटिंग का मुद्दा मौजूद है। ऐसे में केवल जोन अध्यक्ष सचिन मेघानी को निशाना बनाना राजनीतिक खींचतान अधिक प्रतीत होता है।
यदि सचिन मेघानी पर लगे वसूली के आरोप सही साबित होते हैं तो निश्चित रूप से उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए। लेकिन दूसरी ओर यह भी तय होना चाहिए कि जिन वार्डों में खुलेआम अवैध निर्माण हो रहे हैं, वहां के जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय हो।
सबसे बड़ा सवाल रायपुर नगर निगम मुख्यालय की भूमिका पर भी खड़ा हो रहा है। आखिर लगातार शिकायतों और नोटिसों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या फिर राजनीतिक दबाव में लीपापोती?
रायपुर नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी के लगभग 60 पार्षद चुनकर आए हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि रायपुर की जनता ने भाजपा पर भरोसा जताया है। ऐसे में भाजपा संगठन, नगर निगम प्रशासन और शहर के विधायकों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे अवैध प्लाटिंग, अवैध निर्माण और भ्रष्टाचार जैसे मामलों पर कठोर कार्रवाई करें।
महापौर मीनल चौबे भी कई मंचों से यह कह चुकी हैं कि अवैध प्लाटिंग और भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इसके विपरीत दिखाई दे रहे हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि भाजपा संगठन केवल एक चेहरे पर कार्रवाई करता है या फिर जोन क्रमांक 10 में फैले पूरे अवैध निर्माण नेटवर्क की निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदार लोगों पर समान रूप से कार्रवाई करता है। क्योंकि यदि कार्रवाई केवल राजनीतिक संतुलन साधने तक सीमित रही, तो जनता के बीच गलत संदेश जाएगा और भाजपा पर किया गया जनता का विश्वास कमजोर पड़ सकता है।




