छत्तीसगढ़

रोजबहार कॉलोनी में बड़ा खुलासा,रिकॉर्ड में 104 मकान, जमीन पर नहीं मिला कोई निशान

रायपुर। राजधानी रायपुर की रोजबहार कॉलोनी में हाउसिंग बोर्ड की आवास योजना से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज 104 मकानों का जमीन पर कोई स्पष्ट अस्तित्व नहीं मिलने से करोड़ों रुपये के संभावित घोटाले की आशंका गहरा गई है।

ड्रोन तस्वीरों और कॉलोनी के लेआउट प्लान की तुलना में सामने आया कि जिस स्थान पर मकान दर्शाए गए थे, वहां अब खाली जमीन, अव्यवस्थित निर्माण या अलग उपयोग दिखाई दे रहा है। इससे पूरे प्रकरण में अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
नक्शे में मकान, मौके पर खाली जमीन जांच में सामने आया कि कॉलोनी के आधिकारिक लेआउट में 104 मकानों की स्पष्ट प्लानिंग दिखाई गई है। लेकिन मौके की स्थिति इससे मेल नहीं खाती। कई मकान नंबर रिकॉर्ड से गायब बताए जा रहे हैं, जबकि कुछ स्थानों पर निर्माण का स्वरूप पूरी तरह अलग नजर आया।


स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों से इस गड़बड़ी की जानकारी होने के बावजूद किसी स्तर पर गंभीर कार्रवाई नहीं हुई।
करोड़ों की गड़बड़ी की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन मकानों का निर्माण कागजों में दिखाकर राशि निकाली गई है, तो यह मामला 20 से 25 करोड़ रुपये तक की वित्तीय अनियमितता में बदल सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि:
क्या मकान कभी बने ही नहीं?
यदि बने थे तो गायब कैसे हो गए?
निर्माण और आवंटन की राशि किसके खाते में गई?
योजना पर उठे सवाल
यह परियोजना वर्ष 2006-07 में गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। लेकिन अब सामने आई अनियमितताओं ने पूरी योजना की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
प्रशासनिक जांच की तैयारी
मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर दस्तावेजों, लेआउट प्लान और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
जनता पूछ रही है जवाब
104 मकानों का रिकॉर्ड आखिर कैसे गायब हुआ?
क्या यह सुनियोजित घोटाला है?
इतने वर्षों तक जिम्मेदार अधिकारी चुप क्यों रहे?
गरीबों के नाम पर आया पैसा आखिर कहां गया?
रोजबहार कॉलोनी का यह मामला अब केवल एक कॉलोनी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी आवास योजनाओं की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल बनकर उभर रहा है।

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