हेमंत को जीवनदान या उनकी अपनी रणनीति?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके परिवार की हर तरफ से घेराबंदी हुई है। उनके खिलाफ लाभ के पद के मामले में चुनाव आयोग में शिकायत हुई थी, जिस पर आयोग ने अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को भेज दी है। उनके खिलाफ एक जनहित याचिका हाई कोर्ट में डाली गई थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई है।

- एम. डी. आरिफ की कलम से
रायपुर। अवसरवादी आदमी की परिभाषा यह होती है कि वह पानी में गिर जाए तो उसी में नहाने लगे। इसके लिए यह भी कहा जाता है कि फिसल गए तो हर हर गंगे! भाजपा कुछ इसी तरह का काम झारखंड में कर रही है। झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार को गिराने में भाजपा विफल रही है। ऐसा नहीं है कि उसने प्रयास नहीं किया। प्रयास तो पिछले करीब दो साल से चल रहा है। लेकिन सफलता नहीं मिली। प्रदेश में सरकार का समर्थन कर रहे कांग्रेस के कुछ विधायकों ने राष्ट्रपति चुनाव में क्रॉस वोटिंग की लेकिन वह कोई बड़ी बात नहीं है क्योंकि खुद झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी महिला आदिवासी के नाम पर द्रौपदी मुर्मू का समर्थन किया। राष्ट्रपति चुनाव के बाद कहा जा रहा था कि सरकार किसी भी समय गिर जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके परिवार की हर तरफ से घेराबंदी हुई है। उनके खिलाफ लाभ के पद के मामले में चुनाव आयोग में शिकायत हुई थी, जिस पर आयोग ने अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को भेज दी है। उनके खिलाफ एक जनहित याचिका हाई कोर्ट में डाली गई थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई है।
उनके पिता शिबू सोरेन के खिलाफ लोकपाल में शिकायत हुई थी और इस पर भी अदालत ने रोक लगाई है। केंद्रीय एजेंसियों ने उनके विधायक प्रतिनिधि को गिरफ्तार किया है और मीडिया एडवाइजर से ईडी ने कई बार पूछताछ की है। इन सबके बावजूद सरकार नहीं गिरी है। बिहार में जदयू के भाजपा से अलग होकर राजद, कांग्रेस के साथ सरकार बनाने के बाद कांग्रेस के विधायक एकजुट हो गए हैं। तो अब भाजपा के नेताओं और सोशल मीडिया के समर्थकों ने कहना शुरू कर दिया है कि केंद्र सरकार ने हेमंत सोरेन को जीवनदान दे रखा है। यह भी कहा जा रहा है कि कोई बड़ी योजना होगी इसी वजह से सरकार नहीं गिराई जा रही है। हालांकि हकीकत यह है कई प्रयास के बावजूद कामयाबी नहीं मिली है।



