3. शिमला की पहाड़ियों में बस्तर का बजा डंका, 71वीं अखिल भारतीय नृत्य प्रतियोगिता में जीता इनाम

जगदलपुर: बस्तर सिर्फ अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं जाना जाता, बस्तर अपनी सांस्कृतिक विरासत और गौरवशाली परंपरा के लिए भी पहचाना जाता है. जितनी समृद्ध बस्तर की विरासत और गौरवशाली परंपरा है, उतनी समृद्ध यहां की लोक कलाएं और कलाकार हैं. बस्तर के कलाकार विश्व पटल पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं. बस्तर के कलाकारों ने एक बार फिर हिल स्टेशन शिमला में अपना कमाल दिखाया है.
शिमला की पहाड़ियों में बस्तर का डंका
खूबसूरत वादियों वाले हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में 71वीं अखिल भारतीय नाट्य और नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. इस आयोजन में बस्तर की बेटियों ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया. देशभर से आए कलाकारों के बीच बस्तर की पारंपरिक वेशभूषा, लोक संस्कृति और मनमोहक लोक नृत्य शैली ने लोगों को भाव विभोर कर उनका दिल जीत लिया. इस उपलब्धि के साथ बस्तर की बेटियों ने न केवल अपने क्षेत्र बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया.
71वीं अखिल भारतीय नृत्य प्रतियोगिता में जीता इनाम
ऑल इंडिया आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (AIAA) की ओर से शिमला में आयोजित इस 5 दिवसीय राष्ट्रीय सांस्कृतिक प्रतियोगिता में, देश के विभिन्न राज्यों के सैकड़ों कलाकारों ने भाग लिया. कलाकारों के बीच हुई कड़ी प्रतिस्पर्था में बस्तर की टीम ने अपनी शानदार प्रस्तुति के दम पर प्रथम पुरस्कार हासिल किया. इस सम्मानित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता रहे, जिन्होने कलाकारों की हौसला अफजाई की.
बधाइयों का लगा तांता
विजेता बनी बस्तर की टीम में पूनम भारती, रितु शोरी, रामेश्वरी कश्यप, संतोषी कश्यप, देवकी नेताम, प्रज्ञा दुबे, नीलावती भवानी और कृति मौर्य का नाम शामिल है. बस्तर की बेटियों की इस राष्ट्रीय उपलब्धि से पूरे बस्तर और छत्तीसगढ़ में खुशी का माहौल है. लोककला प्रेमियों और क्षेत्रवासियों ने पूरी टीम को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की.



