छत्तीसगढ़

4. युद्ध का असर अंडों के बाजार पर, कुवैत निर्यात बंद होने से कीमतों में गिरावट

रायपुर। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव और युद्ध के असर अब खाद्य बाजार में भी देखने को मिल रहे हैं। इस अंतरराष्ट्रीय स्थिति के कारण भारत से कुवैत को भेजे जाने वाले अंडों का निर्यात बंद हो गया है। इसका सीधा असर छत्तीसगढ़ समेत देश के कई राज्यों के पोल्ट्री कारोबार पर पड़ा है। कुवैत को रोजाना करीब एक करोड़ अंडों की आपूर्ति होती थी, जो अब बंद हो गई है। इससे देश के कई राज्यों में अंडों की अधिकता हो गई है और कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिल रही है। छत्तीसगढ़ में भी पिछले एक सप्ताह से रोजाना करीब 20 लाख अंडों का अतिरिक्त स्टॉक बच रहा है।

छत्तीसगढ़ में रोज 80 लाख अंडों का उत्पादन:

छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख अंडा उत्पादक राज्यों में शामिल है। प्रदेश में प्रतिदिन करीब 80 लाख अंडों का उत्पादन होता है। इसमें से लगभग 45 से 50 प्रतिशत अंडे अन्य राज्यों में भेजे जाते हैं, जबकि बाकी की खपत राज्य के भीतर ही हो जाती है। लेकिन गर्मी के मौसम में अंडों की मांग कम हो जाती है। ऐसे में उत्पादन जारी रहने के कारण अंडों को कोल्ड स्टोरेज में रखना पड़ रहा है।

कीमतों में आई बड़ी गिरावट:

सर्दियों के मौसम में अंडों की मांग बढ़ने से रिटेल बाजार में अंडे की कीमत 8.50 रुपये तक पहुंच गई थी। लेकिन अब मांग घटने और स्टॉक बढ़ने से कीमतों में तेज गिरावट आई है। पोल्ट्री फार्म में कीमत: करीब 3.75 रुपये प्रति अंडा, थोक बाजार में: एक दर्जन लगभग 60 रुपये, रिटेल बाजार में अंडा करीब 5.50 रुपये प्रति बिक रहा है, विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में कीमतों में और गिरावट संभव है।

कुवैत निर्यात बंद होने का असर:

पोल्ट्री कारोबारियों के अनुसार छत्तीसगढ़ से सीधे कुवैत अंडों का निर्यात नहीं होता, लेकिन दक्षिण भारत के कई राज्यों से बड़ी मात्रा में अंडे कुवैत भेजे जाते थे। युद्ध की स्थिति के कारण यह निर्यात फिलहाल बंद हो गया है। इस वजह से वे राज्य अपने अंडे देश के अन्य राज्यों में कम कीमत पर बेच रहे हैं, जिससे छत्तीसगढ़ से बाहर जाने वाले अंडों की मांग कम हो गई है। पहले छत्तीसगढ़ से रोजाना 40 से 45 लाख अंडे अन्य राज्यों में भेजे जाते थे, लेकिन अब यह संख्या लगभग आधी रह गई है।

 

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