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9. बार-बार गर्म किया तेल बना सकता है कैंसर का बड़ा कारण, AIIMS के डॉक्टर ने दी चेतावनी

डीप फ्राई करने के बाद बचे हुए तेल को दोबारा गर्म करना कई लोगों को सस्ता तरीका लग सकता है। आखिर बड़े फास्ट फूड आउटलेट्स में भी तेल का बार-बार इस्तेमाल होता दिखाई देता है। लेकिन क्या यह आदत आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती है? एक्सपर्ट्स की मानें तो जवाब है हां…डॉ. प्रियंका सेहरावत जो AIIMS, नई दिल्ली से ट्रेंड जनरल फिजिशियन और न्यूरोलॉजिस्ट हैं और वर्तमान में गुरुग्राम स्थित द न्यूरोमेड क्लिनिक से जुड़ी हैं, बताती हैं कि कुकिंग ऑयल को बार-बार गर्म करना लंबे समय में गंभीर हेल्थ रिस्क पैदा कर सकता है।

तेल को बार-बार गर्म करने पर क्या होता है?

डॉ. सेहरावत के अनुसार, जब डीप-फ्राइंग के लिए इस्तेमाल किए गए तेल को बार-बार गर्म किया जाता है, तो वह टूटने लगता है और उसमें हानिकारक रसायन बनने लगते हैं। हाल ही में जयपुर के एक फास्ट फूड आउटलेट पर किए गए सर्वे का हवाला देते हुए वह बताती हैं कि तेल का एक ही बैच इतना बार गर्म किया गया कि वह पूरी तरह काला हो चुका था जो खराब होने का साफ संकेत है।

बार-बार गर्म किए गए तेल से कार्सिनोजेनिक कंपाउंड, टोटल पोलर कंपाउंड, पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (PAHs), ट्रांस फैट और फ्री रेडिकल्स जैसे खतरनाक तत्व निकलते हैं, जो शरीर के लिए गंभीर रूप से हानिकारक हो सकते हैं। ये सभी तत्व शरीर में सूजन, कोशिकाओं को नुकसान और डीएनए डैमेज जैसी समस्याएं बढ़ा सकते हैं।

हेल्थ रिस्क

बार-बार गर्म किया गया तेल सिर्फ कैंसर का खतरा ही नहीं बढ़ाता, बल्कि दिल की सेहत के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है। ऐसे तेल में बना खाना नियमित रूप से खाने से खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ सकता है। धमनियों में प्लाक जमने का खतरा बढ़ता है। हार्ट अटैक और कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का रिस्क बढ़ सकता है। इन टॉक्सिन्स के कारण कैंसर और हार्ट डिजीज का खतरा कई गुना तक बढ़ सकता है।

सुरक्षित विकल्प क्या है?

खर्च बचाने के लिए तेल को बार-बार डीप-फ्राई में इस्तेमाल करना सही नहीं है। हालांकि, अगर आप तेल को फेंकना नहीं चाहते, तो एक सीमित और सुरक्षित तरीका अपनाया जा सकता है तेल को अच्छी तरह छानकर साफ कंटेनर में स्टोर करें। इसे 1–2 दिन के भीतर हल्के उपयोग, जैसे तड़का लगाने के लिए इस्तेमाल करें। दोबारा डीप-फ्राई करने से बचें, क्योंकि ज्यादा तापमान पर तेल की क्वालिटी तेजी से गिरती है और हानिकारक कंपाउंड्स और ज्यादा बनते हैं।

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