5. महिलाओं की मौत का चौथा बड़ा कारण है सर्विकल कैंसर, जानें क्या हैं बचाव के उपाय

देश में हर साल हजारों महिलाओं को अपनी चपेट में लेने वाले गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (सर्विकल कैंसर) का स्वदेशी टीका मिलने जा रहा है। विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह गुरुवार को जैव प्रौद्यौगिकी विभाग के सहयोग से तैयार इस टीके को लॉन्च करेंगे।
1000 गुना एंटीबॉडी दिखाई-
अधिकारियों ने बताया कि ‘क्वैड्रीवैलेंट’ देश में विकसित ह्यूमन पेपीलोमा वायरस (एचपीवी) के खिलाफ पहला टीका होगा। हाल में भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) को इस टीके के उत्पादन की मंजूरी दी थी। एचपीवी यौन संबंधों के कारण संचारित होने वाला सबसे सामान्य संक्रमण है। वहीं ‘क्वैड्रीवैलेंट’ टीका चार अलग-अलग वायरस या अन्य सूक्ष्म जीवों जैसे चार विभिन्न एंटीजन के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को उत्प्रेरित कर कार्य करता है। इसने करीब 1000 गुना अधिक एंटीबॉडी प्रतिक्रिया प्रदर्शित की है। भारत में सर्वाइकल कैंसर 15 से 44 वर्ष के आयु वर्ग की महिलाओं में दूसरा सर्वाधिक संख्या में पाया जाने वाला कैंसर है।
महिलाओं को सुरक्षा-
कोरोना टीकाकरण के लिए बनी तकनीकी समिति के चेयरमैन एनके अरोड़ा ने कहा, देश में बना टीका लांच करना बेहद ही रोमांचक अनुभव है। हमें खुशी है कि हमारी बेटियां, पोतियां इसे लेकर घातक बीमारी से सुरक्षित हो जाएंगी। उन्होंने बताया कि यह टीका काफी प्रभावी होगा क्योंकि 85 प्रतिशत से 90 प्रतिशत मामलों में सर्वाइकल कैंसर एक विशेष वायरस की वजह से होता है। और यह टीका उस वायरस के खिलाफ पूरी तरह काम करता है। अगर हम अपने बच्चों को यह वैक्सीन देंगे तो वे संक्रमण से सुरक्षित रहेंगे और 30 साल बाद भी उन्हें इस तरह की कोई समस्या नहीं आएगी।
दुनियाभर में कमी-
विशेषज्ञों के मुताबिक, दुनियाभर में सर्विकल कैंसर की दो वैक्सीन हैं। इनमें पहली क्वाड्रिवेलेंट वैक्सीन और दूसरी बाइवेलेंट वैक्सीन है। भारत में भी यह टीका मौजूदा था लेकिन दुनियाभर में इसकी भारी कमी की वजह से लोगों तक पहुंच मुश्किल थी। अब पहला स्वदेशी टीका बन गया है तो महिलाओं तक पहुंचाना आसान होगा। सूत्रों के मुताबिक, डायरेक्टर जनरल ऑफ इंडिया की विषय विशेषज्ञ समिति ने जून में नौ वर्ष से 26 वर्ष की महिलाओं को यह टीका देने की सिफारिश की थी। इसे नौ से 14 साल की बच्चियों को दिया जा सकता है। सरकार के विश्लेषण में यह पता चला है कि इस वैक्सीन से 6,11,16 और 18 स्ट्रेन से बचाव हो सकता है।
महिलाओं की मौत का चौथा बड़ा कारण-
सर्विकल कैंसर दुनियाभर में कैंसर से महिलाओं की मौत का चौथा कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, वर्ष 2020 में दुनियाभर में इससे छह लाख महिलाओं को जान गंवानी पड़ी। भारत में प्रति वर्ष सर्विकल कैंसर के 1,22,844 मामले दर्ज होते हैं। इनमें से 64,478 महिलाओं की मौत हो जाती है। 1.3% प्रति वर्ष की दर से बढ़ रहा
-सर्विकल कैंसर से 3.42 लाख मौतें गरीब और मध्यम आय वाले देशों में दर्ज हुईं। डब्ल्यूएचओ का लक्ष्य सदी के अंत तक इसे खत्म करना है।
-खास बात दुनियाभर में सर्विकल कैंसर की अब तक सिर्फ दो वैक्सीन बन पाई हैं, इसलिए इनकी किल्लत ज्यादा। कीमत भी काफी अधिक।
-अश्वेत महिलाओं में स्टेज 4 सर्विकल कैंसर विकसित होने की संभावना अधिक होती है, लेकिन दक्षिण में 40 से 44 वर्ष की आयु की श्वेत महिलाओं में इस रोग में सबसे अधिक वार्षिक वृद्धि 4.5% की दर से होती है।
क्या है सर्विकल कैंसर
सर्विकल कैंसर ह्यूमन पैपिलोमावायरस की वजह से होता है। यह वायरस लंबे समय तक शरीर में रहता है और बाद में सर्विकल कैंसर का कारण बनता है। हालांकि, जिन महिलाओं का प्रतिरक्षा तंत्र अच्छा होता है उनके शरीर में ये वायरस पनप नहीं पाता और खत्म हो जाता है। लेकिन एचआईवी या अन्य किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित महिलाओं को इस कैंसर के होने की आशंका ज्यादा रहती है। इस कैंसर के अधिकतर मामले एडवांस स्टेज में सामने आते हैं। सर्विकल कैंसर के लक्षणों के बारे में जानकारी न होना और इस बीमारी को नजरअंदाज करने से ऐसा हो रहा है।
कैसे बचें-
अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार, 25 वर्ष से 65 वर्ष की आयु की महिलाओं के लिए अकेले सर्वाइकल कैंसर की जांच की सिफारिश की जाती है। यदि सिर्फ एचपीवी परीक्षण उपलब्ध नहीं है, तो लोग एचपीवी / पैप की जांच करवा सकते हैं। हर पांच साल में परीक्षण या हर तीन साल में एक पैप स्मीयर हर महिला को करवाना चाहिए। एचपीवी वैक्सीन को लगवाकर महिलाएं इस कैंसर से बच सकती हैं। इसके अलावा नियमित सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग टेस्ट कराएं। असुरक्षित यौन संबंध से बचना चाहिए। जिन्हें जेनिटल मस्से हों या उसके लक्षण हों उनके साथ यौन संबंध बनाने से बचें।



